घुमारवीं (बिलासपुर)। कोरोना से लड़ने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कितना संजीदा है इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि फ्रंट लाइन पर काम कर रही आशा वर्कर्स के लिए सुरक्षा उपकरण तक नहीं दिए गए हैं। ऊपर से इन्हें फरवरी के बाद मानदेय तक नहीं दिया गया है।
आशा वर्कर बीना धीमान ने कहा कि 3 अप्रैल को उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया गया। उसके बाद लोगों का ब्योरा एकत्रित करने के लिए 3 से 9 अप्रैल तक 7 दिन के लिए विशेष मुहिम भी लगा दिया। मात्र 4 मास्क और एक सैनिटाइजर एक टीम को दिया गया। उसके बाद आज तक एक भी मास्क और सैनिटाइजर उन्हें नहीं दिया गया। विभाग ने उनकी ड्यूटी आरोग्य सेतु एप भी पीड़ित लोगों के मोबाइल पर डाउनलोड करने में लगा दी है। बीना ने कहा कि उनके पास कोई भी ऐसे सुरक्षा उपकरण नहीं हैं जिससे वो अपनी सुरक्षा करें। ऐसे में उन्हें अब अपने और अपने परिवार की चिंता सताने लगी हैं। बीना ने बताया कि उन्हें जो प्रशासन द्वारा 3500 रुपये मासिक भत्ता दिया जाता है कि वह भी फरवरी से नहीं दिया गया। इसके चलते वह अब अपनी ही जेब से सैनिटाइजर लेने में असमर्थ हैं।
गौरतलब है कि जिले में इस समय 600 आशा वर्कर कार्यरत हैं। घुमारवीं स्वास्थ्य खंड में 147 आशा कार्यकर्ता कार्य कर रही हैं। आश्चर्य की बात कि लगभग 2 माह से घर-घर कोरोना के संक्रमण के खिलाफ लड़ रही आशा कार्यकर्ता पिछले दो माह से मानदेय से महरूम है। उन्हें अभी तक विभाग की ओर से किसी प्रकार का हैंड सैनिटाइजर ग्लव्स तो दूर मास्क तक उपलब्ध नहीं करवाए जा रहे हैं। विधायक राजेंद्र गर्ग ने बताया कि स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि आशा वर्करों को जरूरी सुरक्षा उपकरण मुहैया करवाए जाएं।