पंडोह-टकोली में बंटा पैसा, पंडोह में सरकारी भूमि पर बने भवनों का मुआवजा रुका
जिले में करोड़ों की राशि होने के बाद भी मुआवजा देने से पीछे हट रही इकाई
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। कीरतपुर-मनाली फोरलेन के निर्माण और इसपर आपदा से प्रभावित लोगों के मुआवजे को लेकर सरकार की दोहरी कार्यप्रणाली सामने आई है। सूचना का अधिकार से मिले दस्तावेजों ने मुआवजे की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां पंडोह-टकोली खंड में सरकार ने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताकर भुगतान रोक दिया है, वहीं बिलासपुर में 19 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि होने के बावजूद एनएचएआई स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा है।
एनएचएआई के विशेष भू-अर्जन अधिकारी (एसएलएयू-1) पंडोह से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पंडोह बाईपास से टकोली खंड के बीच राइट ऑफ वे से बाहर हुए नुकसान के लिए एनएचएआई ने कुल 1,58,93,499 रुपये जारी किए थे। इसमें से 1,39,96,794 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। पंडोह कार्यालय के मुताबिक, शेष बची करीब 18.96 लाख की राशि उन प्रभावितों की है, जिनके भवन सरकारी भूमि पर बने हैं। एनएचएआई का तर्क है कि सरकारी भूमि पर बने ढांचों को मुआवजा देने के लिए अभी तक कोई स्पष्ट आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। दूसरी ओर, बिलासपुर भू-अर्जन कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। आरटीआई से खुलासा हुआ है कि एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण इकाई ने हिमाचल प्रदेश लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता शिमला को पत्र लिखकर माना है कि राइट ऑफ वे से बाहर हुए नुकसान के लिए 19.12 करोड़ की राशि उपलब्ध है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब इकाई यह नहीं बता पा रही कि यह राशि किन मूल कारणों से रोकी गई है। फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति का कहना है कि जब पहले बिलासपुर में सरकारी भूमि पर बने 40 भवनों को करीब पांच करोड़ का मुआवजा दिया गया, तो अब नियम क्यों बदले। क्या यह 19.12 करोड़ की राशि राइट ऑफ वे से बाहर के निजी नुकसान की है या सरकारी भूमि में मौजूद भवनों की। यह राशि वर्तमान में किस खाते में जमा है और इस पर ब्याज का क्या लाभ मिल रहा है। समिति के महासचिव मदन लाल व अन्य लोगों का कहना है कि एनएचएआई की भूमि अधिग्रहण इकाई जानकारी छिपा रही है। एक तरफ कुल्लू में मुआवजा वितरण पर रोक की बात कही जा रही है, वहीं बिलासपुर में करोड़ों की राशि होने की पुष्टि पत्र संख्या 1158-1160 दिनांक 16 दिसंबर 2025 में खुद विभाग ने की है। बार-बार जानकारी मांगने पर भी कार्यालय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का बहाना बना रहा है।