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आज मुहर्रम पर दुआ को उठेंगे कई हाथ

Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
Bilaspur
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बिलासपुर। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में रविवार को बिलासपुर में मोहर्रम मनाया जा रहा है। बिलासपुर में भी इस मौके पर मोहर्रम मनाया जाएगा। मुस्लिम समुदाय से जुडे़ लोग इस दिन हजरत इमाम हुसैन की करबला मैदान में दी गई शहादत को याद कर श्रद्धांजलि के रूप में खुदा से प्रार्थना करते हैं। इस दौरान दुनिया में अमन और चैन की दुआ के लिए कई हाथ उठेंगे।
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आल हिमाचल मुस्लिम वेलफेयर सोसायटी के प्रदेश उपाध्यक्ष हुसैन अली ने बताया कि भारत का मोहर्रम सबसे निराला है। इसके अपने खास रंग हैं । मोहर्रम की सबसे प्रभावी चीज इसकी भारतीयता है। यह वाक्य भले ही ईराक के करबला मैदान का हो, लेकिन हमारे अंदर जो दिल-जज्बा धड़कता है वह हिंदुस्तानी है। उन्होंने कहा कि तीज त्यौहारों पर लोग एक दूसरे के करीब आते हैं। मोहर्रम का त्योहार भी इससे अछूता नहीं है। मजलिस, जुलूस, मर्सिया और अजादारी की कोई भी शक्ति देखिए इस पर भारतीय संस्कृति के निशान मिल जाएंगे। चांद की दसवीं तारीख को मुहर्रम पड़ता है, जो शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यजीद नाम का एक हुक्मरान ऐश परस्त था, उसने लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाकर रख दी। लोगों पर हो रहे अत्याचार हजरत इमाम हुसैन से सहन नहीं हुए। उन्होंने बादशाह हुक्मरान यजीद से टकराने का कदम उठाया। यजीद ने उनकी गिरफ्तारी को सेना भेजी। उन्हें ऐसे मैदान में ठहरने के लिए मजबूर किया जहां दूर-दूर तक पानी नहीं था। दो मुहर्रम को वह करबला मैदान में उतरने के लिए मजबूर हुए। अंत में हथियार उठाकर वे सेना से भिड़ गए और शहीद हुए, लेकिन वे विश्व के लिए संदेश छोड़ गए कि सच्चाई, ईमानदारी, न्याय की प्राप्ति, लोकतंत्र की स्थापना और मानवता के लिए इंसान को अपनी कुर्बानी भी देनी पडे़ तो पीछे न हटें।
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