बरमाणा (बिलासपुर)। पंजगाईं गांव में हरिदास शर्मा द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन कथा वाचक पंडित नीरज भाई ने प्रवचनों की अमृत वर्षा करते हुए श्रीकृष्ण भगवान के जन्म की महिमा का बखान किया।
उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण अवतार होते ही सरा गोकुल आनंदमय हो गया। चारों ओर खुशियां छा गई। सभी देवता ब्रह्मा, विष्ण, महेश आकाश से पुष्प वर्षा करने लगे। महाराजा कंस के जुल्मों का अंत होने लगा। पंडित नीरज ने कंस के जुल्मों का वर्णन करते हुए कहा कि कंस ने अपने पिता का राजपाठ छीनकर राज गद्दी हासिल की थी। अपने पिता को उसने जेल में बंदी बनाकर रख दिया था। कंस ने अपने राज्य में आतंक का माहौल पैदा किया था। गऊओं का बध, संतों और ऋषियों का अपमान हा रहा था। पृथ्वी रोती-रोती भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश के पास पहुंची। माता पृथ्वी ने कंस के अत्याचारों से मुक्ति मांगी तो धरती पर श्री कृष्ण अवतरित हुए। उन्होेंने कहा कि पृथ्वी पर जब भी अत्याचार बढ़ता है तो भगवान अवतार लते हैं। पंडित ने बताया कि देवकी महाराजा कंस की चचेरी बहन थी। उसकी शादी वासुदेव से हुई परंतु शादी के दिन ही जब कंस अपनी बहन को ससुराल छोड़ने जा रहा तथा तो आकाशवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान तेरा काल बनेगी। इस पर कंस ने देवकी और वासुदेव को जेल में डाल दिया।