बिलासपुर। सरकार की ओर से खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी इस बार डिपो होल्डर के माध्यम से नहीं मिलेगी। सब्सिडी राशि अब सीधे किसान के खाते में जाएगी। केंद्रीय कृषि मंत्रालय हिमाचल प्रदेश में इसी साल से एमएफएमएस (मोबाइल फर्टीलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम) पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रहा है। इसका बाकायदा आगाज भी हो गया है। पहले चरण के तहत इस प्रोजेक्ट के लिए हिमाचल में सिर्फ बिलासपुर जिला को चुना गया है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से देश के दस राज्यों के दस जिलों में मोबाइल फर्टीलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम शुरू करने की योजना है। योजना के तहत हिमफैड, इफ्को के सोसायटी, डिपो होल्डर पंजीकृत किए जाएंगे। उसके बाद इन्हें आनलाइन किया जाएगा। प्रोजेक्ट के पहले चरण में सोसायटी और डिपुओं का पंजीकरण किया जाएगा। प्रोजेक्ट के अतंर्गत कृषि विभाग ने 97 सोसायटी और डिपुओं का पंजीकरण किया है। सोसायटी या डिपो होल्डर किसान की ओर से खरीदी गई खाद की जानकारी सिस्टम में आनलाइन करेंगे। उसके 24 घंटों के दौरान किसान के खाते में सब्सिडी की राशि जमा हो जाएगी। किसान को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीयकृत बैंक में बचत खाता खोलना होगा। वहीं किसान के पास किसान क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड होना चाहिए। तभी किसान इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। दूसरे चरण में किसानों को सब्सिडी दी जाएगी।
कृषि विभाग बिलासपुर के उप निदेशक जीसी लखनपाल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि किसानों को खाद पर मिलने वाली सब्सिडी की राशि अब सीधे उनके खाते में जाएगी। बिलासपुर जिला को एमएफएमएस पायलट प्रोजेक्ट से जोड़ा गया है। जो कि देश के दस राज्यों के दस जिलों में शुरू होगा।