बिलासपुर। सूबे में शिक्षा बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में किताबों का काला कारोबार चल रहा है। यह खुलासा शिक्षा बोर्ड की स्कूलों में चल रही जांच से हुआ है। जांच टीम ने यह पाया है कि स्कूल संचालक शिक्षा बोर्ड की किताबों से नहीं पढ़ा रहे हैं। जबकि बोर्ड के पाठ्यक्रम की कॉपी कर किसी दूसरे प्रकाशकों की किताबों से पढ़ा रहे हैं। ऐसे में शिक्षा बोर्ड को सालाना करोड़ों रुपये का घाटा भी हो रहा है। निजी प्रकाशक एनसीईआरटी के नाम पर नकली किताबों को स्कूलों में जाकर वाहनों में बेच रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि मुनाफा कमाने के चक्कर में निजी स्कूल संचालक बुक विक्रेताओं, प्रकाशकों के साथ मिलकर शिक्षा बोर्ड की किताबों की बजाय दूसरी किताबों से पढ़ाते हैं। निजी स्कूल संचालक व बुक विक्रेता मुनाफा कमाने चक्कर में सस्ते दामों पर इन किताओं को प्रकाशक से खरीद लेते हैं जिसके बाद महंगे दामों पर बच्चों को बेच देते हैं। जबकि निजी स्कूल संचालक को सीधे किताबों की खेप स्कूलों में ही मंगवा लेते हैं क्योंकि इसमें मार्जन कम और मुनाफा ज्यादा है। पुस्तक विक्रेता भी इन्हीं किताबों को अभिभावकों को महंगे दामों पर बेच रहे हैं।
बिलासपुर में चल रहे शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में किए गए निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है कि ज्यादातर स्कूल शिक्षा बोर्ड की किताबों से नहीं पढ़ा रहे हैं, वह किसी और प्रकाशक की किताबों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। कई बड़े स्कूल भी ऐसे हैं जो नियमों को ताक में रखकर अपनी मनमर्जी से अन्य प्रकाशकों की किताबों से पढ़ा रहे हैं। जबकि जब निजी स्कूल संचालक शिक्षा बोर्ड से मान्यता लेते हैं तो उसमें साफ किया जाता है कि स्कूल चलाने के दौरान शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम बच्चों को पढ़ाया जाएगा और शिक्षा बोर्ड की किताबें ही लगाई जाएंगी। इसके लिए बाकायदा शपथ पत्र भी स्कूलों से लिया जाता है।
स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि बोर्ड के पास किताबें प्राप्त मात्रा में उपलब्ध हैं जोकि डिपुओं में पड़ी हुई हैं। सभी जिलों से स्कूलों की निरीक्षण रिपोर्ट मांगी जाएगी, जिसके बाद आगामी कार्रवाई की जाएगी।