बिलासपुर।
सूबे में बारिश और बर्फबारी न होने से फसलों और फलों की पैदावार पर संकट छा गया है। बिलासपुर में भी बारिश के न होने से गेहूं की फसल की पैदावार खतरे में है। कृषि विभाग के अधिकारियों की माने तो अगर आने वाले 15 दिनों के अंदर बारिश नहीं होती है तो गेहूं की पैदावार पर इसका विपरित असर भी देखने को मिल सकता है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखना शुरू हो गई हैं।
बिलासपुर जिला में 31,878 हैक्टेयर भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलें, सब्जियां, फल उगाए जाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जिला की केवल 5,740 हैक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा है। जबकि बाकी की जमीन बारिश के भरोसे ही है। ऐसे में किसानों को अपनी फसलों के बोने के बाद बारिश का इंतजार करना पड़ता है। वहीं दूसरी और जिला में 26,400 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं पर फसल उगाई जाती है। इसमें भी ज्यादातर भूमि बारिश के पानी पर भी निर्भर है।
अगर समय पर बारिश न पड़े तो फसलें बर्बाद हो जाती हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों और डॉक्टरों का कहना है कि हालांकि अभी तक जिला में ऐसे हालात नहीं बने हैं जिसमें की कहा जा सके कि फसलें बर्बाद हो गई हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी 15 दिन तक अगर बारिश न हो तो फसलों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर बारिश नहीं हुई तो इससे जिला के अप्पर इलाकों में गेहूं की फसल की पैदावार में गिरावट आ जाएगी। इसमें अप्पर नयना देवी क्षेत्र, हरलोग, स्वारघाट, नम्होल, कोटधार, बंदला, लाड़ाघाट सहित अन्य अप्पर एरिया है जहां पर कोहरा नहीं पड़ता, वहां पर गेहूं की फसल की पैदावार पर असर पड़ेगा। बाकी जगहों पर कोहरे के पड़ने से गेहूं को नमी मिल रही है। इससे इसकी पैदावार पर कोई खासा असर नहीं पड़ेगा।
इस बारे में कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर डीएस पंत का कहना है कि अभी 15 दिन ओर तक बारिश का इंतजार किया जा सकता है। अभी तक कहीं से भी किसी प्रकार की सूखे की रिपोर्ट नहीं आई है।