अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर की ओर से जिला न्यायिक परिसर में एचआईवी एड्स पर जागरुकता एवं अधिकार शिविर का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता परवीन चौहान सीजेएम एवं सचिव उपमंडलीय विधिक साक्षरता समिति बिलासपुर ने की।
उन्होंने कहा कि पैरा लीगल वालेंटियर तथा पंचायत प्रतिनिधि का नैतिक कर्तव्य बनता है कि वे लोगों को एचआईवी के बारे में जागरूक करें तथा एड्स रोगियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में एचआईवी के मरीजों के लिए निशुल्क दवाइयां उपलब्ध होने के साथ आईसीटीसी सेंटर में निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने पैरालीगल वालंटियरों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में एचआईवी एड्स से ग्रस्त मरीजों को इस गंभीर बीमारी से संबंधित जानकारी दें और मरीज की हर संभव सहायता करें।
जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. ऋषि टंडन ने लोगों को बताया कि एचआईवी एड्स छूने से, हाथ मिलाने से, साथ खाने-पीने से नहीं फैलता। इसके फैलने के मुख्यत चार कारण हैं। इनमें असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित खून चढ़ाने, सूई के बार-बार इस्तेमाल से तथा एचआईवी से ग्रस्त मां से बच्चे को एचआईवी फैलने का खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि एचआईवी संक्रमण धीमी गति से चलते हुए एड्स रोग बनने में एक से आठ साल लग जाते हैं।
उन्होंने बताया कि मां से बच्चे को ये रोग फैलने से बचाने के लिए दवाइयां उपलब्ध हैं। उन्होंने गर्भवती महिलाओं से आह्वान किया वे अपनी एचआईवी जांच अवश्य करवाएं ताकि जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहे।
उन्होंने बताया कि रेड रिब्बन क्लब तथा अन्य स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से लोगों को जागरूक करने के कारण एचआईवी रोगियों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आई है। सिविल जज मोनिका ने शिविर में उपस्थित पैरालीगल वालंटियरों, पंचायत प्रतिनिधियों व विधिक साक्षरता शिविर से जुड़े अधिवक्ताओं को एचआईवी एवं एड्स रोग बारे जागरूकता से संबंधित विस्तृत जानकारी दी।