अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग से हो रहीं कैंसर जैसी बीमारियां
फसलों में कीटनाशकों का ज्यादा उपयोग करने से खराब हो रही जमीन : चंदेल
संवाद न्यूज एजेंसी
घुमारवीं (बिलासपुर)। कृषि और बागवानी में आवश्यकता से अधिक कीटनाशकों के प्रयोग से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। इस भागदौड़ वाली जिंदगी में किसी को यह मालूम नहीं चल रहा है कि खाने की थाली में पौष्टिक आहार की मात्रा कम और जहर ज्यादा परोसा जा रहा है। क्योंकि यह जमीनी हकीकत है और कृषि वैज्ञानिकों ने इसकी पुष्टि कई बार की है। तभी तो कैंसर रोगियों की भी संख्या बढ़ती जा रही है ।
कृषि विभाग में कार्यरत विषयवाद विशेषज्ञ बृजेश चंदेल के अनुसार प्रदेश में 80 से 90 फीसदी किसान और बागवान वैज्ञानिक तरीके से कीटनाशकों का स्प्रे नहीं कर रहे हैं । अक्सर किसान दुकान जाते हैं और दुकानदार जो भी कीटनाशकों ने देता है, वह उसका पूरी मात्रा जाने बिना स्प्रे कर देते हैं । चाहे उसे फायदा हो या न हो। यही नहीं, अपनी फसल बचाने के चक्कर में किसान कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं, जिसके कारण बीमारियां पैदा हो रही हैं। इसके कई कारण हैं। एक तो लोग सीधे स्प्रे किए गए खाद्य पदार्थों का उपयोग कर रहे हैं। दूसरा, खेतों में जितने भी कीटनाशकों का प्रयोग स्प्रे के रूप में होता है, वह बारिश के पानी के साथ पीने के पानी में मिल जाता है। इस कारण बीमारियां अधिक फैलती हैं।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब प्रदेश में कैंसर के मरीज बहुत कम होते थे। लेकिन अब कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है । चंदेल के अनुसार इस पर विभाग लगातार प्रभावी कदम उठाता है। समय-समय पर किसानों को सरकार के जागरूकता कार्यक्रमों के तहत जागरूक भी किया जाता है। क्योंकि अभी भी हिमाचल में कीटनाशकों का उपयोग ज्यादातर भूमि पर नहीं होता है और यदि इस भूमि पर व्यावसायिक खेती की जाए तो किसानों के साथ प्रदेश की आय में भी बढ़ोतरी होगी। चंदेल के अनुसार पेस्टिसाइड एक ऐसा चक्र है, जिसमें एक बार फसल ले तो उसके बाद उसमे फंसते ही चले जाएंगे और फंसना ही पड़ेगा, क्योंकि हम प्रकृति की अपनी कीटाणुओं से लड़ने की व्यवस्था को बिगाड़ रहे हैं । फसलों में कीटनाशकों का ज्यादा उपयोग करने से जमीन की सेहत लगातार खराब हो रही है और साथ ही हमारी थाली भी जहरीली होती जा रही है।
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15 से 20 एमएल तक की जा रही स्प्रे
साइपरमैथरीन, क्लोरोपीरीफोस, अट्र्जीन, लोडिसएकोरोजन, ट्रॉपिकॉनाजोले, कॉर्डेप आदि कीटनाशक मार्केट में उपलब्ध हैं । इनका अधिकतर प्रयोग किया जाता है।। लेकिन विशेषज्ञ के अनुसार यदि इन सभी का सही मात्रा में प्रयोग किया जाए तो ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं रहती है। इन सभी कीटनाशकों की डोज 1 एमएल से 2 एमएल प्रति 15 लीटर रहती है, लेकिन अधिक पैदावार के लालच के चलते किसान 15 से 20 एमएल तक का स्प्रे कर रहे हैं। इसकी वजह से मिट्टी के साथ इंसान की सेहत के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। वही अधिकतर किसान खेतों में स्प्रे करते समय आगे की ओर चलकर स्प्रे करते हैं। जबकि जब भी स्प्रे करना हो तो हवा का रुख भांप कर ही सप्रे करना चाहिए और हमेशा स्प्रे करते समय पीछे की तरफ चलना चाहिए ताकि स्प्रे शरीर की तरफ न आए ।