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साठ साल की उम्र के बाद नहीं बना पाएंगे मिड-डे मील

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गोपाल शर्मा
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जुखाला(बिलासपुर)। स्कूलों में दोपहर का खाना बनाने वाले वर्कर अब 60 साल की उम्र पूरी होने के बाद अपनी सेवाएं नहीं दे पाएंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने कवायद तेज कर दी है। हालांकि अभी तक शिक्षा विभाग के पास इस प्रकार का कोई डाटा नहीं है कि कितने मिड-डे मील वर्कर 60 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं लेकिन अब शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूलों को आदेश जारी कर दिए गए हैं कि वह अपने स्कूलों के मिड-डे मील वर्करों के आयु प्रमाण पत्र मुहैया करवाएं।
उल्लेखनीय है कि जिला के प्राथमिक स्कूलों में 845 मिड-डे मील वर्कर कार्य कर रहे हैं। जबकि अपर प्राथमिक स्कूलों में 446 मिड-डे मील वर्कर कार्य कर रहे हैं जिसमें कई ऐसे भी हैं जो 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं। हालांकि राज्य सरकार के आदेश में साफ कहा गया है कि 60 साल की उम्र पार कर चुके वर्करों से स्कूल में खाना नहीं बनाया जा सकता है लेकिन हैरत की बात है कि अभी शिक्षा विभाग के पास ऐसा कोई डाटा नहीं है, जिससे मिड-डे मील वर्करों की उम्र का पता लग सके।
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शिक्षा विभाग के उप निदेशक प्रारंभिक रविंद्र सिंह का कहना है कि 60 वर्ष की आयु पार करने के बाद वर्कर खाना नहीं बना सकते हैं। इस संबंध में सभी स्कूलों से डाटा मांगा गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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जिले में 27208 बच्चों को दिया जा रहा मिड-डे मील
जिला में कुल 27208 बच्चों को वर्तमान में मिड-डे मील के तहत दोपहर का खाना दिया जा रहा है। इसमें प्राथमिक स्कूलों में 16085 और अपर प्राथमिक में 11123 स्कूली छात्र-छात्राएं दोपहर का भोजन ग्रहण कर रही हैं।
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स्वास्थ्य जांच का भी है प्रावधान
छह महीने बाद मिड-डे मील वर्करों के स्वास्थ्य की जांच करने का भी प्रावधान है। शिक्षा विभाग का दावा है कि वह हर 6 महीने में एक बार वर्करों के स्वास्थ्य की जांच करवाते हैं।
 
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