अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। एक ओर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री मिलावटी कारोबार रोकने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभाग में स्टाफ न होने के कारण मिलावट का काला कारोबार करने वालों की चांदी हैं। सूबे में मात्र दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी हैं। ऐसे में प्रदेश में कारोबार कर रहे तीन लाख से अधिक कारोबारियों पर नजर रख पाना संभव नहीं हैं।
दिवाली को मात्र 10 दिन शेष रह गए हैं लेकिन अभी तक नाम मात्र के सैंपल भरे जा सके हैं। स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए बार-बार निदेशालय से सरकार को पत्र भेजा जाता है लेकिन इसके बाद भी रिक्त चल रहे पदों को भरने के लिए कोई तैयार नहीं हैं। जबकि दूसरे राज्यों से मिलावटी मिठाइयों की खेप रात के अंधेरे में सूबे में पहुंचना शुरू हो गई है।
गत सालों के रिकार्ड देखें तो सूबे में हजारों टन मिलावटी मिठाइयां, देसी घी और अन्य खाद्य वस्तुएं पकड़ी जा चुकी हैं। विभाग की हालत ऐसी हो गई है कि उनके पास मात्र दो खाद्य सुरक्षा अधिकारी बचे हैं। मजबूरी में डेजिगनेटिड अधिकारियों को भी खाद्य सुरक्षा अधिकारी का चार्ज दे कर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा हैं। यहीं नहीं स्टाफ कम होने से कोर्ट केस में भी पैरवी नहीं हो पा रही हैं। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में चंबा व शिमला में ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी बचे हैं। दोनों अधिकारी पूरे राज्य को देख रहे हैं।
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प्रदेश बन चुका है मिलावटी कारोबार का बड़ा अड्डा
प्रदेश मिलावटी कारोबार का एक बड़ा अड्डा बनता जा रहा हैं। गत सालों की बात करें तो जहां सूबे में टनों के हिसाब से मिलावटी देसी घी पकड़ा जा चुका हैं, वहीं 2011 में मंडी जिला में सोनपापड़ी की एक बड़ी खेप पकड़ी थी। मंडी जिला इसका सबसे बड़ा केंद्र हैं जहां से कुल्लू, लाहौल-स्पीति, रामपुर, किन्नौर, भरमौर आदि क्षेत्रों को दिवाली के समय भारी मात्रा में मिठाइयों की सप्लाई होती हैं।