बिलासपुर। जहां राज्य सरकार एक ओर अपने कार्यकाल का एक साल पूरा होने का जश्न मना रही है। वहीं बिलासपुर में अभी तक एक साल में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया। सत्ता में आने से पहले और बाद में लोगों से किए गए वादों में अभी तक कुछ काम नहीं हो पाया है।
साल में न कोलबांध पेयजल योजना का उद्घाटन हो पाया न ही हाईड्रो कॉलेज की कक्षाएं कांगड़ा से बिलासपुर लाई जा सकीं। जबकि इसी साल इंटीग्रेटिड डेवलपमेंट स्कीम के तहत भी पैसा बिलासपुर के लिए नहीं आ सका। कुल मिला कर देखा जाए तो सरकार का साल पूरा हो गया है लेकिन जिला के लिए अभी तक घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं मिल पाया।
उल्लेखनीय है कि सत्ता में आने पर भाजपा ने पांच महीने में कोलबांध पेयजल योजना का उद्घाटन करने का दावा किया गया था। बीच में सीएम और जेपी नड्डा का कार्यक्रम भी भाजपा ने घोषित कर दिया है लेकिन साल पूरे होने के बाद भी इस योजना का उद्घाटन नहीं हो पाया। इस योजना से जिला के करीब एक लाख लोगों को पानी मिलना था। इसके अलावा बिलासपुर को झीलों का शहर बनाने को लेकर कोई कदम नहीं उठाए गए थे।
भाजपा ने दावा किया था कि पहले साल में इसकी डीपीआर बना कर तैयार की जाएगी लेकिन इस पर अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ। पर्यटन विभाग को इस प्रोजेक्ट को नकार भी चुका है।
इस वर्ष एम्स का प्रशासनिक ब्लॉक बना कर तैयार करने की बात कही गई थी लेकिन आज इस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। बिलासपुर में हाईड्रो कॉलेज की कक्षाएं इसी साल से शुरू करने का दावा था लेकिन कक्षाएं इस वर्ष भी कांगड़ा में ही लग रही हैं। हालत ऐसी है कि बिलासपुर में फोरलेन निर्माण का कार्य भी रुका पड़ा है। सही मायनों में कहा जाए तो जिला में एक साल में अभी तक घोषणाओं के अलावा कुछ नहीं हुआ है।