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Bilaspur News: बायो इनोवेशन कॉन्क्लेव में शामिल हुए एम्स बिलासपुर के 40 एमबीबीएस छात्र

Mon, 18 May 2026 11:54 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
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बायो इनोवेशन एंड वर्कशॉप कॉन्क्लेव में भाग लेने वाले एम्स बिलासपुर के एमबीबीएस छात्र। स्रोत: एम
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आईआईटी मंडी केटेलिस्ट के कार्यक्रम में रिसर्च पर हुई चर्चा
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बायोटेक्नोलॉजी, हेल्थकेयर स्टार्टअप की मिली जानकारी

संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। एम्स बिलासपुर के 40 एमबीबीएस छात्रों ने आईआईटी मंडी केटेलिस्ट की ओर से आयोजित बायो इनोवेशन एंड वर्कशॉप कॉन्क्लेव-2026 में भाग लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे नवाचार, मेडिकल रिसर्च और उद्यमिता के विभिन्न पहलुओं को समझा।
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इस कार्यक्रम में छात्रों ने शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और स्टार्टअप फाउंडर्स के साथ संवाद कर आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक और नवाचार की भूमिका के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की। एम्स बिलासपुर के कार्यकारी निदेशक ले. जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह के नेतृत्व में संस्थान लगातार छात्रों को पारंपरिक मेडिकल शिक्षा के साथ व्यावहारिक और शोध आधारित अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसी उद्देश्य के तहत छात्रों के इस दल के साथ डीन रिसर्च प्रो. (डॉ.) अनुपम पराशर और डॉ. नवदीप आहूजा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। कॉन्क्लेव के दौरान आयोजित कीनोट लेक्चर, पैनल चर्चा और इंटरैक्टिव सत्रों में छात्रों को बायोटेक्नोलॉजी, मेडिकल रिसर्च, हेल्थकेयर इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस प्रकार प्रयोगशाला और क्लीनिकल सेटअप में विकसित होने वाले विचारों को शोध और तकनीक के माध्यम से मरीजों तथा समाज के लिए उपयोगी समाधानों में बदला जा सकता है। कार्यक्रम में छात्रों ने ट्रांसलेशनल रिसर्च, इनोवेशन आधारित समस्या समाधान और हेल्थकेयर सेक्टर में उपलब्ध नए कॅरिअर के बारे में भी जानकारी प्राप्त की। इसके अलावा स्टार्टअप मॉडल, बायोमेडिकल इनोवेशन और उद्योग से जुड़ी संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। कॉन्क्लेव के माध्यम से छात्रों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक, रिसर्च और नवाचार की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी। ऐसे में मेडिकल छात्रों के लिए केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें रिसर्च, उद्यमिता और नई तकनीकों से भी जुड़ना होगा। संस्थान प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना को बढ़ावा देते हैं। इससे उन्हें मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ वास्तविक जीवन की चुनौतियों को समझने और उनके समाधान विकसित करने की प्रेरणा मिलती है।
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