अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन में नियमों को ताक पर रख कर वन भूमि से पेड़ों का कटान हुआ है। वन विभाग के पास इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है कि पेड़ कटान किसी नियम के अनुसार और कब हुआ है जिसका खुलासा वन विभाग की ओर से दी गई सूचना से हुआ है। वन विभाग की ओर से डीएफओ सरोज भाई पटेल की ओर से दी गई जानकारी में बताया कि इस संबंध में उनके कार्यालय में कोई सूचना नहीं है।
फोरलेन समिति ने पूछा था कि वन विभाग ने वन विभाग की भूमि के अलावा निजी भूमि, सरकारी भूमि में जो पेड़ काटे गए जो वन निगम दोहन के लिए सौंपे गए थे, उन पेड़ों के कटान के कार्य के दौरान वन विभाग के किस किस स्तर के किन अधिकारियों द्वारा मौका निरीक्षण किया जाना था तथा उन अधिकारियों ने पेड़ों के इस कटान के दौरान किस किस क्षेत्र का/ लॉट का में कब-कब निरीक्षण किया जिसकी पूरी जानकारी मांगी गई थी लेकिन वन विभाग ने इस संबंध में अपनी पत्र संख्या नंबर/आरटीआई/ 9863 दिनांक 7.01.2019 को बताया कि जो सूचना मांगी गई है वह इस कार्यालय में मौजूद नहीं है।
समिति ने के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, सीता राम, जगदीश, सुभाष चंद, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, मुख्य सलाहकार लेख राम और महा सचिव मदन लाल शर्मा ने बताया कि जब विभाग के पास कोई रिकार्ड नहीं है जिससे साफ होता है कि विभाग ने इस संबंध में ग्राउंड स्तर पर कोई कार्य नहीं किया गया है। कहा कि विभाग के अधिकारियों की मिली भगत से पूरे कार्य बंद कमरों में बैठक कर किए गए हैं। इससे सरकार और पर्यावरण दोनों को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा सैकड़ों पेड़ निजी भूमि से नियमों को ताक पर रख कर काटे गए हैं जिसका सीधा नुकसान आम लोगों को हुआ है।
समिति ने कहा कि इस संबंध में प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील कर दी गई है। जबकि सरकार को भी इस संबंध शिकायत की जाएगी।
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सही ढंग से नहीं हुआ पेड़ कटान
वन विभाग के अरण्यपाल कार्यालय से मिली सूचना में जबकि साफ किया गया है कि पेड़ कटान का 25 फीसदी निरीक्षण रेंज अधिकारी करेंगे। एसीएफ 15 फीसदी, डीएफओ 10 फीसदी और अरण्यपाल 2 फीसदी मौका निरीक्षण करेंगे। इनके निरीक्षण के बाद पेड़ कटान होना था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया है।