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पत्थरों के बीच खेल की बारीकियां सिखने को विवश खिलाड़ी

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बिलासपुर। खेलों का हब बन चुका बिलासपुर जिला में अभी भी खिलाड़ियों को सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। आठ करोड़ रुपये से बनने वाला सिंथेटिक ट्रैक का निर्माण पिछले चार सालों से अधर में लटका हुआ है। केंद्र से ट्रैक के लिए दो करोड़ की किस्त भी तीन साल पहले खेल निदेशालय शिमला के पास पहुंच गई है। लेकिन, अभी तक बिलासपुर में ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इसके अलावा हॉकी मैदान में छह करोड़ से बिछने वाला एस्ट्रो टर्फ भी महज घोषणाओं तक ही सीमित रह गया है। खिलाड़ियों को पत्थरों के बीच दौड़ना पड़ता है।
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चुनावों के दौरान इस तरह के सभी मुद्दे लोगों के बीच चर्चा के विषय बने हुए हैं। नेता भी इन मुद्दों को लेकर राजनीति कर रहे हैं। इन मुद्दों पर राजनेता लोगों से वोट भी मांग रहे हैं कि सरकार आने के बाद इन्हें बनवाया जाएगा। लेकिन, लोग भी नेताओं से कह रहे हैं कि जनाब जब सत्ता में रहते कुछ नहीं हुआ तो अब आगे क्या हो जाएगा।

लुहणू खेल परिसर प्रदेश भर में विख्यात है। यहां पर एक साथ जल, थल व नभ खेलों का आयोजन किया जाता है। हॉकी, फुटबाल, एथलेटिक, हैंडबाल, कबड्डी, क्रिकेट, बैडमिंटन के मैदान एक ही जगह पर हैं। लेकिन दुख की बात यह है कि मैदान में पत्थरों के ऊपर ही खिलाड़ियों को अभ्यास करना पड़ता है। करीब तीन साल पहले कहा गया था कि बिलासपुर के एथलेटिक मैदान में सिंथेटिक ट्रैक बिछने वाली है। इसका पैसा खेल विभाग शिमला के पास पहुंच गया है। लेकिन, अभी तक कार्य शुरू नहीं हो पाया है। सुबह व शाम के समय खिलाड़ी पत्थरों से भरे ट्रैक पर दौड़ने को विवश हैं। इससे पहले भी सिंथेटिक ट्रैक बिलासपुर के लिए मंजूर हुआ था। लेकिन धूमल सरकार उसे हमीरपुर ले गई। इससे यह कार्य अधूरा रह गया। वहीं यहां पर हॉकी मैदान में भी एस्ट्रो टर्फ बिछाने की योजना बनी थी। आकलन तैयार कर निदेशालय को भेजा गया। करीब छह करोड़ का एस्टीमेट बनाया गया। सब कुछ ओके हो गया। लेकिन बाद में वह भी बीच में लटक गया। आज उस मैदान में लावारिस पशु घूमते हुए नजर आते हैं। खिलाड़ियों को गोबर के बीच हॉकी खेलनी पड़ती है। पत्थर के ऊपर से हॉकी की गेंद छिटक कर कभी भी किसी खिलाड़ी को चोटिल कर देती है।
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लुहणू मैदान में होती है अब नलवाड़ी मेले की सांस्कृतिक संध्या
कोर्ट के स्कूल परिसर केे 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार के कार्यक्रमों की रोक होने के बाद अब लुहणू के हॉकी मैदान में नलवाड़ी मेले की सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन किया जाता है। स्टेज, लोगों के बैठने की व्यवस्था व बॉक्स बनाने के लिए मैदान को खोदा जाता है। इसमें पानी की पाइपों को डालकर व्यवस्था बनाई जाती है। मेला संपन्न होने के बाद मैदान में टूटी हुई कुर्सियां, खाली बोतलें व गड्ढे खिलाड़ियों के लिए परेशानी बन जाते हैं। करीब एक सप्ताह से ज्यादा समय तो खिलाड़ियों को मैदान सुधारने में ही लग जाता है।

क्रिकेट मैदान का हुआ केवल विकास
लुहणू खेल परिसर में क्रिकेट मैदान भी है। मैदान की हरियाली व सुंदरता पर खंडहर बन चुके खेल विभाग के भवन व मैदान ग्रहण लगा रहे हैं। सुबह के शाम के समय क्रिकेट मैदान को पानी से सींचा जाता है। मैदान के अंदर किसी को नहीं आने दिया जाता, जबकि साथ लगते दूसरे मैदानों में लावारिस पशु घूमते हुए देखे जा सकते हैं। अगर क्रिकेट मैदान की तरह बिलासपुर के इन मैदानों को भी सुधारा जाता तो लुहणू खेल परिसर की सुंदरता और ज्यादा निखर जाती।

कांग्रेस सरकार ने की अनदेखी : सुभाष
सदर से भाजपा प्रत्याशी सुभाष ठाकुर का कहना है कि कांग्रेस सरकार की अनदेखी के कारण अभी तक सिंथेटिक ट्रैक नहीं बन पाया है। इससे खिलाड़ी पत्थरों के बीच दौड़ने को विवश हैं। भाजपा सरकार के आते ही इस ट्रैक का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।

सरकार बनते ही होगा इसका कार्य शुरू : बंबर
सदर से कांग्रेस प्रत्याशी बंबर ठाकुर का कहना है कि पैसा विभाग के पास आया है। पहले वाले सिंथेटिक ट्रैक को धूमल सरकार हमीरपुर ले गई थी। लेकिन अब बिलासपुर में कांग्रेस सरकार के प्रयासों से ट्रैक बनने जा रहा है। सरकार बनते ही इसका कार्य शुरू हो जाएगा।
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