अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण को लेकर बरती गई खामियों और निशानदेही के लिए किए गए आवेदनों को लेकर क्या कार्रवाई की गई है, जिला राजस्व अधिकारी ने भू-अधिग्रहण इकाई के तहसीलदार को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। कार्रवाई की जानकारी को फोरलेन विस्थापित समिति व उपायुक्त कार्यालय को देने को कहा है।
फोरलेन विस्थापित समिति के महासचिव मदनलाल शर्मा का कहना है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण में किए गए भूमि अधिग्रहण में बरती गई अनियमितताओं को लेकर उपायुक्त बिलासपुर कार्यालय ने 2016 में एक बैठक का आयोजन किया था। बैठक में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने 283 पृष्ठों का ज्ञापन दिया।
इस ज्ञापन पर उपायुक्त कार्यालय ने उचित कार्रवाई करते हुए भूमि अधिग्रहण की विशेष इकाई के तहसीलदार को सात दिन के भीतर जवाब देने के आदेश जारी किए। तहसीलदार की ओर से दिए गए जवाब में उपायुक्त ने उक्त इकाई को आदेश दिए कि ज्ञापन में दर्ज कमियों का निपटारा तहसीलदार को अपने स्तर पर करना है, जिस पर संबंधित तहसीलों से एसडीएम से नियमों के अनुसार अनुमति लेकर एक माह के अंदर कार्रवाई करे और की गई कार्रवाई को फोरलेन समिति के साथ-साथ उपायुक्त कार्यालय को भी अवगत करवाए लेकिन विडंबना यह है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी आजतक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
इस पर समिति ने एक बार पुन: उपायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करवाई है कि उनके द्वारा दिए गए आदेशों को उक्त इकाई नहीं मान रही है। ऐसे में इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस पर कार्यालय उपायुक्त जिला राजस्व अधिकारी ने अपने कार्यालय के पत्र संख्या (बीएलएस-एसके-12(420)/2016 31086-96) दिनांक 10-7-2018 को भूमि अधिग्रहण इकाई के तहसीलदार को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है। समिति ने उपायुक्त बिलासपुर द्वारा दिए गए इस आदेश पर समिति ने अपना एतराज जताया है कि इस संबंध में एनएचआई के परियोजना निदेशक को किसी तरह का कोई पत्राचार नहीं किया गया है, जबकि इससे पूर्व कार्यालय उपायुक्त ने ज्ञापन में दर्ज मत संख्या 20 से 23 तक का जवाब परियोजना निदेशक से मांगा था, जिस पर आजतक कोई जवाब नहीं दिया गया है।