जुखाला (बिलासपुर)। उत्तर भारत के सुप्रसिद्ध स्थल मार्कंडेय के स्नान गृह में निकल रही अविरल जलधारा से पाइप लाइन लगाने का मामला उग्र होता दिख रहा है। स्थानीय लोगों व युवाओं का कहना है कि स्नानगृह में सदियों से निकल रही अविरल जलधारा से पाइप निकाल कर अलग नल लगाए जा रहे हैं जोकि सही नहीं है। अगर पवित्र तीर्थ स्थल की धार्मिक आस्था से छेड़छाड़ की गई तो इसका अंजाम सही नहीं होगा। इसके लिए वह आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
बिलासपुर जिले के मार्कंडेय नामक स्थान पर स्थित सुप्रसिद्ध मार्कंडेय मंदिर के स्नानगृह में निकल रही अविरल जलधारा से पाइप लगाने का मामला उग्र होने की संभावना है। पर्यटन विभाग द्वारा इस स्थल का कायाकल्प किया जा रहा है लेकिन लोगों और युवाओं का कहना है कि इस तीर्थ स्थल की धार्मिक आस्था से छेड़छाड़ सहन नहीं की जाएगी।
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सदर विधायक सुभाष ठाकुर व जिला प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए ताकि प्राचीन समय से चली आ रही इस धार्मिक आस्था के स्थल को बचाया जा सके। बंदला निवासी युवा डॉक्टर महेंद्र ने बताया कि बंदला गांव के युवाओं ने तय किया है कि सावन के इस पूरे माह सभी युवा मार्कंडेय से जल लेकर आएंगे और बंदला धार में विराजमान ताड़केश्वर महादेव का नित्य प्रति जलाभिषेक करेंगे। महेंद्र ने बताया कि यात्रा पैदल ही हो रही है और इसकी दूरी लगभग 5 किलोमीटर जाना और 5 किलोमीटर आना है। सारा रास्ता पथरीले पहाड़ी से होते हुए है। यात्रा शुरू होने के तीन दिन तक सब सामान्य था लेकिन चौथे दिन वहां जाकर देखा कि जिस गोमुख से जल निकलता है उसको काटकर पाइप डाली गयी है, उस पाइप में वाल्व लगे हुए हैं। जब पुजारी से पूछा तो उन्होंने बताया कि हिमाचल पर्यटन विभाग यह सब करवा रहा है।
डॉ. महेंद्र ने कहा कि प्रश्न उठता है क्या जनमानस की आस्था को ठेस पहुंचा कर पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं। इस बारे में वो सदर के विधायक सुभाष ठाकुर से भी बात करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के उपायुक्त से भी मसला उठाया जाएगा। बैशाखी के दिन लगने वाला मेला उसी पवित्र स्नान के लिये प्रसिद्ध है। इसी स्नान की वजह से पंजाब से लोग लंगर लगाने आते हैं। मान्यतानुसार चार धाम यात्रा के बाद जब तक मार्कंडेय जी में स्नान न करो तब तक चार धाम यात्रा पूर्ण न होती। ऐसे अनेक पहलु इस पवित्र स्थान एवं स्नान से जुड़े हुए हैं।