अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं के साथ लगते जिला मंडी के बलद्वाड़ा की ग्राम पंचायत चौक के वार्ड नंबर 5 गांव रालन का अश्वनी कुमार अमेरिका के मेक्सिको में जिंदगी और मौत से लड़ रहा है। अश्वनी कुमार वहां एक निजी होटल में काम करता था लेकिन परिवार को सूचना मिली है कि उनका बेटा सड़क किनारे घायल पड़ा था, जहां से उसे ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती किया गया है। वह जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहा है। वहीं अब परिजनों ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और प्रदेश सरकार से मदद की गुहार लगाई है।
अश्वनी की मां रोशनी देवी ने रोते हुए बताया कि उसका इकलौता बेटा 4 वर्षों से अमेरिका में एक निजी होटल में काम करता था। हाल ही में उन्होंने मेक्सिको सिटी में एक निजी होटल में ज्वाइन किया था। 2 दिन पहले ही उन्हें सूचना मिली कि उनका बेटा मेक्सिको के एक निजी अस्पताल एसपलूल में भर्ती है और जिंदगी और मौत से लड़ रहा है।
रोशनी देवी ने बताया कि जिस होटल में वह काम करता था उसी होटल के कुछ लोग उसे अस्पताल ले गए लेकिन अब वह अस्पताल में अकेला है। वहीं परिवार के लोगों ने विदेश मंत्री से मांग की है कि केंद्र सरकार मामले में हस्तक्षेप कर इस बात की भी जांच करवाए कि उनके बेटे को इस हालत में सड़क किनारे किस ने फेंका।
अश्वनी कुमार के चाचा सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्हें अमेरिका के होटल के कर्मचारी द्वारा ही यह सूचना मिली थी कि अश्वनी कुमार सड़क पर घायल अवस्था में पड़ा था।
अश्वनी ने 4 वर्ष पहले ही चंडीगढ़ के एक निजी प्रशिक्षण संस्थान से होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा किया था। इसके बाद अमेरिका के एक निजी होटल में कार्य कर रहा था। उन्होंने अश्वनी कुमार की 2 साल पहले ही सरकाघाट की ज्योति से शादी हुई है।
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पूरा परिवार सदमे में है : दादा
अश्वनी कुमार के दादा पूर्व सैनिक दुर्गा दास ने बताया कि जैसे ही परिवार को अश्वनी के घायल होने की सूचना मिली तो यह सारा परिवार ही सदमे में चला गया। अश्वनी के पिता नारायण सिंह अपने परिचितों के साथ दिल्ली चले गए हैं ताकि विदेश मंत्रालय से संपर्क कर अपने बेटे का हाल जान सके लेकिन जान पहचान न होने के कारण उन्हें विदेश मंत्रालय के दिल्ली में धक्के ही खाने पड़ रहे हैं।
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केंद्र सरकार करे परिजनों को भेजने की व्यवस्था
अश्वनी के परिजन ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि अश्वनी कुमार कुछ समय पहले घर आया था। उन्होंने भी अपने बेटे नागेश्वर सिंह को उसके साथ अमेरिका भेज दिया था लेकिन उनका बेटा नागेश्वर अमेरिका में ही किसी दूसरे जगह पर कार्य करता है। उन्होंने भी केंद्र सरकार से गुहार लगाई कि उनके बेटे नागेश्वर को ही केंद्र सरकार तत्काल अश्वनी कुमार के पास भेजने की व्यवस्था करें। ताकि घर का कोई न कोई सदस्य तत्काल अश्वनी कुमार के पास पहुंच सके।