फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bilaspur News: घुमारवीं में 200 केमिस्टों को मिला टीबी उन्मूलन का प्रशिक्षण

Fri, 20 Feb 2026 11:34 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर
विज्ञापन
घुमारवीं में टिफा के तहत आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में मौजूद कैमिस्ट और अधिकारी। संवाद
विज्ञापन
2030 तक टीबी मुक्त भारत बनाने में निभाएंगे अहम भूमिका
विज्ञापन

टिफा कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य व दवा नियंत्रक विभाग की संयुक्त पहल
खांसी की दवा बेचने से पहले पर्ची और मरीज का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य
हिमाचल टीबी मुक्त एप के जरिए मरीजों की होगी निगरानी, सात दिन से अधिक खांसी पर जांच की सलाह

संवाद न्यूज एजेंसी

घुमारवीं (बिलासपुर)। घुमारवीं उपमंडल में क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर टिफा (टीबी फ्री इंडिया एप्रोच) कार्यक्रम के तहत उपमंडलीय स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में ब्लॉक स्तर के लगभग 200 केमिस्टों ने भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग, दवा नियंत्रक विभाग की ओर से संयुक्त रूप से हुए आयोजन का उद्देश्य निजी क्षेत्र विशेषकर दवा विक्रेताओं की भूमिका को मजबूत बनाना था, ताकि वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। टिफा कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण देने के लिए सुरेश वर्मा ने केमिस्टों कैमिस्टों को टीबी उन्मूलन अभियान की रूपरेखा, सरकारी दिशा-निर्देशों तथा उनकी जिम्मेदारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि टीबी जैसी संक्रामक बीमारी को समाप्त करने के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। केमिस्टों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि खांसी से संबंधित किसी भी दवा की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक या अस्पताल की ओर से जारी वैध पर्ची के आधार पर ही की जाए। साथ ही दवा लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति का नाम, पता और संपर्क नंबर का पूरा रिकॉर्ड अपने पास सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा, ताकि जरूरत पड़ने पर मरीज तक आसानी से पहुंचा जा सके।
विज्ञापन

सभी को एप के उपयोग की जानकारी भी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति कफ सिरप या खांसी की दवा लेने आता है तो केमिस्ट को एप में मरीज का पूरा विवरण, संबंधित चिकित्सक का नाम तथा दी गई दवा की जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कॉल के माध्यम से मरीज से संपर्क कर खांसी की अवधि के बारे में जानकारी ली जाएगी। यदि किसी व्यक्ति को सात दिन से अधिक समय से खांसी है तो उसे तुरंत टीबी जांच करवाने की सलाह दी जाएगी। ड्रग इंस्पेक्टर दिनेश गौतम ने शेड्यूल एच-1 में शामिल नई दवा प्रेगाबालिन के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा कि इस दवा की बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त केमिस्टों को सख्त निर्देश दिए गए कि बिना चिकित्सकीय पर्ची के किसी भी व्यक्ति को सिरिंज उपलब्ध न करवाई जाए। प्रत्येक सिरिंज की बिक्री का पूरा विवरण रजिस्टर में दर्ज किया जाए। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल केवल टीबी नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से बचाने और समाज को स्वस्थ बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। कार्यक्रम में खंड चिकित्सा अधिकारी घुमारवीं डॉ. अनुपम शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित रहीं, जबकि ड्रग इंस्पेक्टर दिनेश गौतम ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला महासचिव अरविंद महाजन भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें