बिलासपुर।
जिले के ग्रामीण डाक सेवकों ने बुधवार को बिलासपुर में मांगों को लेकर रैली निकाली। इस मौके पर उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद डाक सेवकों ने उपायुक्त बिलासपुर के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा है। जिले में ग्रामीण डाक सेवकों की हड़ताल के कारण डाक विभाग की व्यवस्था पटरी से उतर गई है। जिले में दो दिन से डाक विभाग की ओर से चिट्ठियों का वितरण नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों के साथ छात्रों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
डाक सेवकों ने बुधवार को मुख्य डाक घर से बाजार होते हुए उपायुक्त कार्यालय तक रैली निकाली। रैली में 200 से भी अधिक डाक सेवकों ने भाग लिया। ज्ञापन के माध्यम से डाक सेवकों ने प्रधानमंत्री से मांग की कि ग्रामीण डाक सेवकों को कमलेश चंद्रा रिपोर्ट की सिफारिश को जनवरी 2016 से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि ढाई साल से अधिक समय बीतने के बावजूद केंद्र सरकार ने इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया है। डाक सेवकों का कहना है कि डाक विभाग में हमारा शोषण किया जा रहा है।
डाक सेवकों पर नई-नई योजनाएं लागू की जा रही है। मगर सुविधाएं न के बराबर हैं। आज के दौर में महंगाई सातवें आसमान पर है। मगर आज भी डाक विभाग के कर्मचारियों को 6 हजार से 10 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। यह चिंता का विषय है।
विक्रम ठाकुर, शशि पाल, भूरी सिंह, रतन लाल, जोगिंद्र पाल, भगत सिंह, चुनी लाल, देवराज, सोहन सिंह, विजय सिंह, अमर सिंह, कुलदीप कुमार, सूरज और शिवराम सहित अन्य डाक सेवकों का कहना है कि जब तक केंद्र सरकार और डाक विभाग ने हमारी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी। इससे सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में आएगी। इसके अलावा विभिन्न परीक्षाओं के लिए जारी होने वाले रोलनंबर भी उम्मीदवारों तक पहुंचना मुश्किल होगा।