बिलासपुर।
विकास के नाम पर लोगों के साथ किस तरह से बर्ताव हो रहा है उसका एक उदाहरण बिलासपुर में पेश आया है। यहां तीन परिवारों के मकान को कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर फोरलेन निर्माण कर रही केएनसीईएल(आईटीएनएल कंपनी) कंपनी ने उखाड़ दिए। लेकिन प्रशासन की लापरवाही इस कद्र है कि अब फिर से मकान बनाने के लिए इन परिवारों को जमीन की निशानदेही तक नहीं करवाई जा रहा है। हालत ऐसी है कि तीनों परिवार दो महीने से टेंट में रहने को मजबूर हैं। जहां न बिजली की सुविधा है न पानी की कोई बंदोबस्त।
फोरलेन विस्थापित मदन लाल शर्मा और राम पाल का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश नियम अनुसार कब्जा हटाने के थे। इसमें निशानदेही कर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था जो फोरलेन निर्माण के तहत आती है। लेकिन प्रशासन और कंपनी ने भड़ास निकालने के लिए धारा 107 का उल्लंघन कर दिया। जिस समय उनका घर गिराया गया वह बीमार माता का उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में करवा रहे थे। कंपनी और प्रशासन ने उन्हें घर में रखा सामान तक नहीं हटाने दिया और घर गिरा दिया।
मदन लाल शर्मा ने कहा कि नियम के अनुसार पहले निशानदेही होनी थी। बिना निशानदेही कोई भी कब्जा नहीं लिया जाता है न दिया जाता है। मदन लाल शर्मा ने दावा किया है कि उनका मकान न रोड अलाइनमेंट में आता है और न ही भूमि अधिग्रहण प्लान में आता है।
केएनसीईएल की निशानदेही को एसडीएम ने निरस्त किया है। फिर से निशानदेही के आदेश भी दिए गए। लेकिन अधिकारियों ने मकान गिराने पहले निशानदेही तक करना जरूरी नहीं समझा। वह कहते हैं कि अब घर तो गिरा दिया है लेकिन अब भी निशानदेही नहीं की जा रही है। इस कारण वह अपने लिए घर का निर्माण तक नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरी में बीमार मां और परिवार के साथ टेंट लगा कर रहने को मजबूर हैं। जहां न तो पानी है और न ही पानी की सुविधा है।
गैर मौजूदगी में घर गिराने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने को लेकर पुलिस में शिकायत की थी। लेकिन कार्रवाई न होने के कारण पीड़ित मंगलवार को शिमला में एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर अनुराग गर्ग से भी मिला। गर्ग ने उन्हें आश्वस्त किया की उनकी शिकायत पर कार्रवाई होगी।
निशानदेही कराएंगे : डीसी
उपायुक्त विवेक भाटिया ने कहा कि अगर उक्त परिवारों को निशानदेही नहीं हुई है तो वह उनसे उनके कार्यालय में आकर मिल सकते हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को निशानदेही करवा दी जाएगी।