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फोरलेन निर्माण मामले में कार्रवाई न करने पर फंसा वन विभाग बिलासपुर

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पिपराघाट पुल पर आने के लिए अंडरपास रास्ता - फोटो : amar ujala
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रितेश गुलेरिया
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान रोड अलाइनमेंट और अवैध डंपिंग मामले में वन विभाग फंसता ही जा रहा है। इस संबंध में एपीसीसीएफ वन शिमला ने कड़ा संज्ञान लिया। वन विभाग बिलासुपर को पत्र लिख कर पूछा कि इतना गंभीर विषय होने पर भी आप ने कार्रवाई क्यों नहीं की। वहीं यह भी पूछा कि इस संबंध में शिमला कार्यालय को क्यों सूचना नहीं दी। एपीसीसीएफ ने इस संबंध में अरण्यपाल बिलासपुर को कड़े आदेश दिए हैं कि तीन दिन में इस मामले की पूरी रिपोर्ट शिमला कार्यालय को दें क्योंकि इस गंभीर मामले में कार्रवाई करने के लिए आप की ओर से पहले ही काफी देरी हो चुकी है।
वहीं आदेश में यह भी कहा गया है कि वन भूमि में अवैध रूप से डंप किए गए मलबे को तत्काल हटाया जाए। पूछा गया है कि जब निर्माण के दौरान रोड अलाइनमेंट बदला गया तो आप के कार्यालय की ओर से कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
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इतना गंभीर मसला होने के बाद भी आप के कार्यालय की ओर से केवल पत्राचार के अलावा कोई कदम नहीं उठाए गए। वहीं अवैध रूप से की गई डंपिंग के मामले में भी बिलासपुर कार्यालय का रवैया चिंताजनक रहा है।
मुख्य अरण्यपाल शिमला कार्यालय से जारी पत्र में अरण्यपाल बिलासपुर को तीन दिन के अंदर पूरे मामले की रिपोर्ट शिमला भेजने को कहा गया है। वहीं इस पूरे मामले पर नियम अनुसार कड़ी कार्रवाई के भी आदेश दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान जहां करीब 9 गांव में रोड अलाइनमेंट बदल डाली गई है। वहीं 71 नदी, नालों और गोबिंद सागर में अवैध रूप से मलबा डाला गया है। शिमला कार्यालय में तैनात जन सूचना अधिकारी कल्याण सिंह(एचपीएफएस)ने शिमला कार्यालय की ओर से इस आदेश के जारी होने की पुष्टि की है।
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इनसेट...
अनियमितताएं बर्तने वाले अधिकारियों के खिलाफ हो कड़ी कार्रवाई
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव मदन लाल शर्मा, उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, जगदीश, सीमा रात, जगत राम, सुभाष चंद, लेख राम आदि ने बताया कि जो विभाग अपने उच्च अधिकारियों को ही गुमराह करने में लगे हैं। उनसे विस्थापित एवं प्रभावित क्या उम्मीद रख सकते हैं कि वह न्याय करेंगे। उक्त लोगों ने अनियमितताएं बर्तने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
 
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