सड़क निर्माण कंपनी का अवैध डंपिंग का सिलसिला नहीं थमा
मछुआरों ने पर्यावरण मंत्रालय दिल्ली को भेजी लिखित में शिकायत, नारेबाजी की
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। झंडूता विधानसभा क्षेत्र के कोसरियां में मत्स्य सहकारी सभा समिति की 10 समितियों ने फोरलेन निर्माण कर रही केएनसीएल कंपनी की ओर से सड़क निर्माण से निकल रहे मलबे को गोबिंद सागर झील में डंप करने पर कड़ा रोष जताया है। समितियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक संयुक्त बैठक मत्स्य सहकारी सभा समिति ब्राह्मणी कलां के मत्स्य कार्यालय के प्रांगण में की जिसकी अध्यक्षता प्रधान श्याम लाल ने की। मछुआरों ने इस दौरान नारेबाजी भी की।
बैठक को संबोधित करते हुए श्याम लाल ने बताया कि सड़क निर्माण कर रही कंपनी का ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, ना ही इस कंपनी को उपमंडलाधिकारी बिलासपुर के आदेशों का कोई फर्क पड़ रहा है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि मछुआरों को अब बड़े आंदोलन करने की जरूरत है। मछुआरों के साथ हो रहे इस अन्याय को मछुआरे किसी भी तरह सहन नहीं करेंगे। सरकार प्रशासन इस मामले को हल्के से ना लें। गोबिंद सागर झील में करीब 3000 मछुआरे हैं जो पहले भाखड़ा बांध परियोजना से विस्थापित एवं प्रभावित हुए हैं। जब से यह झील बनी है तब से इन परिवारों की रोजी-रोटी भी इसी झील से चल रही है। इस झील से ही मछुआरे मछलियां पकड़ कर अपने परिवार का गुजारा करते आ रहे हैं लेकिन अब सड़क निर्माण कंपनी ने इस झील को सड़क निर्माण से निकल रहे मलबे से भरना शुरू कर दिया है जिससे उनकी रोटी को जबरन छीना जा रहा है। इसके अलावा पर्यावरण को भी खासा नुकसान हो रहा है।
मछुआरों ने अपनी लिखित में शिकायत पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी बिलासपुर, उपमंडलाधिकारी (ना) बिलासपुर, निदेशक मछली विभाग बिलासपुर, वन मंडलाधिकारी बिलासपुर, पर्यावरण अभियंता बिलासपुर तथा अपनी-अपनी मत्स्य सहकारी समितियों के प्रधानों को अवगत करवाया है। इस दौरान मछुआरों ने कंपनी के खिलाफ भी नारेबाजी की।
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....खेमराज शर्मा।