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सपना ही बन गया बैरीदड़ोलां पुल

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pool. - फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला ब्यूरो
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बिलासपुर।
सतलुज पर बनने वाला बैरीदड़ोलां पुल अब तक लोगों के लिए सपना ही है। 12 साल पहले शिलान्यास के बाद आज तक एक इंट तक नहीं रखी गई। बैरीदड़ोलां पुल बनने से गोबिंदसागर झील के उस पार झंडूता विस क्षेत्र के लोगों को लाभ मिलेगा। हालांकि कागजों में पुल के लिए 35 लाख खर्च भी हो चुके हैं। लेकिन यहां एक इंट तक नहीं रखी गई है।
औहर ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान जगतराम शर्मा, देशराज शर्मा, बैहनाजट्टां पंचायत की प्रधान विक्रमी देवी, उपप्रधान राजकुमार, डमली के प्रधान प्रेमलाल चौधरी, उपप्रधान प्रीत्तम सिंह, हीरापुर पंचायत की प्रधान सुरेशा शर्मा, ग्रामीण भाखड़ा विस्थापित समिति के प्रधान नंदलाल शर्मा का कहना है कि राजाओं के जमाने में सतलुज पर भंजवाणी के पास लकड़ी का पुल था। इससे रोजाना लोगों का आवागमन रहता था।
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भाखड़ा बांध बनने के बाद गोबिंदसागर पर 11 पुल बनाए जाने को लेकर एग्रीमेंट हुआ था। लेकिन बाद में कंदरौर के अलावा एक भी पुल नहीं बना। इसके चलते दोनों क्षेत्रों की जनता को गोबिंदसागर के पार करने के लिए बोटों का सहारा लेना पड़ता है। जनता की मांग के बाद बैरीदड़ोलां पुल निर्माण को लेकर योजना तैयार की थी। मार्च 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने शिलान्यास भी किया। शिलान्यास के बाद लोगों को आस बंधी थी कि अब पुल का काम शुरू होगा।

लेकिन ऐसा नहीं हो सका। जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि हालांकि कई बार पुल को लेकर डीपीआर तैयार की गई और कई बार रिवाइज भी की गई। लेकिन बजट का प्रावधान न किए जाने की वजह से यह पुल लटका है।
लोगों का कहना है कि यहां के नेता और विधायक इस मुद्दे को सरकार के समक्ष प्रभावशाली ढंग से नहीं उठा सके हैं। न ही विधानसभा में इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया। इस कारण अब पुल निर्माण की योजना अतीत बनकर रह गई है।

मुख्यमंत्री की पुल निर्माण से ना
चुनाव से पहले कंदरौर में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने कहा था कि गोबिंदसागर पर ट्रस्सल के पास पुल का निर्माण किया जा रहा है। यह पुल धराड़सानी के पास फोरलेन से जुड़ेगा। इससे बिलासपुर की जनता का आवागमन सुलभ हो जाएगा। ऐसे में बैरीदड़ोलां पुल निर्माण की कोई आवश्यकता नहीं। यदि भविष्य में जरूरत पड़ेगी तो अन्य जगहों से पुलों का निर्माण करवाया जाएगा।
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जब बनाना नहीं था तो क्यों किया गुमराह
औहर पंचायत के पूर्व प्रधान जगतराम शर्मा और देशराज और पंचायतों के नुमाइंदों का कहना है कि बैरीदड़ोलां पुल निर्माण को लेकर एक दशक तक राजनीति होती रही है। लोगों को पुल को लेकर छला गया है। इससे अब झील के उस पार की एक दर्जन से ज्यादा पंचायतों की हजारों की आबादी खुद को ठगा महसूस कर रही है। उन्होंने कहा कि जब यह पुल बनाना ही नहीं था तो इतने वर्षों तक जनता को क्यों गुमराह किया। नेताओं ने पुल पर राजनीतिक रोटियां सेंकी। उन्होंने कहा कि इस पुल के बन जाने से सदर और झंडूता दोनों हलकों की जनता आपस में जुड़नी थी। लेकिन अब यह पुल सियासत का शिकार होकर रह गया है।
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