बिलासपुर में11 माह की बच्ची में पाया गया कावासाकी रोग
एक लाख बच्चों में पांच से छह बच्चों को ही होती है बीमारी
समय पर उपचार मिलने से डॉक्टर ने बचाई बच्ची की जान
बीमारी का इलाज केवल पीजीआई में, बिलासपुर में भी किया उपचार
सरोज पाठक
बरमाणा (बिलासपुर)। बिलासपुर के जुखाला की 11 माह की बच्ची को कावासाकी रोग पाया गया है जिसे म्यूकोस्यूटियस लिम्फनोड सिंड्रोम भी कहा जाता है। बिलासपुर अस्पताल में तैनात शिशु रोग विशेषज्ञ ने बीमारी को भांपते हुए बच्ची का इलाज शुरू कर दिया जिससे उसकी जान बच गई है। सोचनीय विषय यह है कि जिस बीमारी का इलाज केवल पीजीआई व एम्स में ही होता है उसका उपचार डॉक्टर ने जिला अस्पताल में भी किया जिससे बच्ची की जान बच गई है। अभी बच्ची स्वस्थ होकर घर चली गई है।
डॉक्टरों से मिली जानकारी के अनुसार यह रोग बहुत ही कम बच्चों में पाया जाता है। भारत में एक लाख में पांच से छह बच्चे इस रोग से ग्रसित होते हैं। अगर इसके शुरुआती दिनों में इसे न पहचाना जाए और इसका सही इलाज नहीं किया जाए तो यह हार्ट को छू लेता है इसे एनीयरिज्म भी कहते हैं। इससे दिल के खून की धमनियां फुलकर फट जाती हैं और बच्चे की मौत हो जाती है।
वहीं 11 माह की कृत्तिका के पिता विनोद का कहना है कि 19 जनवरी को कृत्तिका को रात 9 बजे तेज बुखार आया जोकि 104 डिग्री तक था। इसके कारण उन्होंने बच्ची को जिला अस्पताल में दाखिल करवाया दिया। 19 तारीख से लेकर 22 तारीख तक बच्ची का सिर्फ बुखार का इलाज चलता रहा। कोई भी चिकित्सक यह नहीं जान पाया कि बच्ची को असल में इतना भारी बुखार किस कारण हो रहा है लेकिन जब 22 जनवरी को डॉक्टर अंकुर धर्माणी राउंड पर बच्चों की जांच करने आए तो बच्ची के आसार देखकर उन्होंने इसका टेस्ट करवाया और रिपोर्ट आने पर पता चला कि कृत्तिका कावासाकी से पीड़ित है।
बच्ची के माता-पिता के अनुसार डॉक्टर ने बिलासपुर में ही संबंधित बीमारी का इलाज शुरू कर दिया और बच्ची को पहला इंजेक्शन भी दिया जिससे बीमारी बढ़ने के आसार खत्म हो गए और वो स्वस्थ भी हो गई। इसके पश्चात दूसरे इंजेक्शन और इको टेस्ट के लिए बच्ची को पीजीआई भेज दिया गया। उन्होंने डॉक्टर का आभार व्यक्त किया क्योंकि उन्होंने उनकी आर्थिक रूप से और पीजीआई में भी बहुत सहायता की।
वहीं डॉक्टर अंकुर धर्माणी ने कहा कि इस सबका श्रेय वह बच्चों के माता-पिता को देना चाहते हैं जिन्होंने उन पर विश्वास जताते हुए उन्हें बच्चे का इलाज करने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने इसका श्रेय शिक्षा संस्थान पीजीआई और प्रोफेसर व एचओडी डॉक्टर सुरजीत सिंह को दिया है।
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क्या होता है इस बीमारी में
चिकित्सकों के अनुसार यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें पूरे शरीर में रक्त वाहिकाओं में सूजन हो जाती हैं। इसके सबसे आम लक्षणों में बुखार होता है जो सामान्य दवाओं, गर्दन में बड़े लिंफ नोड्स और लाल आंखों, होंठ, हथेलियों या पैरों के तलवों से प्रभावित पांच दिनों से अधिक समय तक रहता है। अन्य लक्षणों में गले में दर्द और दस्त शामिल हैं। लक्षणों की शुरुआत के तीन सप्ताह के भीतर, हाथों और पैरों की त्वचा छील सकती है।
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...सरोज पाठक।