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गौसदनों की देखभाल के लिए सरकार से नहीं मिली सहायता

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विक्रम ठाकुर
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स्वारघाट (बिलासपुर)। गायों के संरक्षण के लिए गत दस साल से संचालित नयनादेवी विधानसभा क्षेत्र की एकमात्र शक्ति गोबिंद गोशाला लैहड़ी बरोटा आज आर्थिक तंगहाली की शिकार हो चुकी है। इससे स्पष्ट नजर आ रहा है कि गोसेवा के संरक्षण व संवर्धन को शुरू की गई प्रदेश सरकार की योजना के प्रकाश की लौ अभी तक जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं।
बता दें कि करीब 10 साल पहले शुरू की गई शक्ति गोबिंद गोशाला आज भी दान की रकम से चलती है। चारों ओर गोरक्षा के नारों के शोर के बावजूद भी गोमाता तंगहाली का शिकार क्यों हो रही है। सरकारी अनुदान न मिलने व आय का कोई अतिरिक्त स्रोत न होने से गोवंश को आमतौर पर खाने के लिए सूखा भूसा ही मिल पाता है।
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गौर हो कि कुछ पदाधिकारियों को छोड़ अधिकांश सदस्य निष्क्रिय हैं। इसके चलते न तो गायों की सही ढंग से देखभाल हो पाती, है और न ही बीमार गायों का उपचार हो पाता है। हालांकि शक्ति गोबिंद गोशाला लेहड़ी बरोटा के प्रबंधक सेवानिवृत्त शिक्षक कमलदेव कौशल अपनी पूरी मासिक पेंशन गोसेवा सदन के ऊपर खर्च कर रहे हैं लेकिन उक्त गोशाला में सांड व गायों के दिनों दिन बढ़ती जा रही संख्या से अब इन्हें आर्थिक तंगहाली के दौर से गुजरना पड़ रहा रहा है।
गोशाला में गायों को भूसा डालने वाले बाबा बताते हैं कि वहां गोशाला में करीब 130 गायें व सांड हैं। इनमें 80 गाय व 50 के करीब सांड व बूढ़े बैल भी हैं। इनकी सेवा के लिए गोशाला में 10 से 11 आदमी सेवादार रखे हुए हैं। दो चार गाय हैं जो दूध देने वाली हैं। इनमें अधिकांश गायें वही हैं जिन्हें लोग घरों से हटा देते हैं।
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कमेटी के प्रबंधक कमलदेव कौशल ने बताया हैं कि गोशाला की सारी व्यवस्था दान पर चलती है। श्री नयना माता मंदिर से पिछले महीने ही 8 माह का इकट्ठा अनुदान जरूर मिला है। अनेक दान दाता रुपये न देकर दाना, चारा, भूसा आदि उपलब्ध करा देते हैं जिससे कुछ हद तक गोशाला का दान पानी चल रहा है। उन्होंने बताया कि बरसात में गोमाता के लिए चारा रखने का भंडार गृह की छत उड़ गई है जिस कारण बारिश के दौरान सारा चारा व तूड़ी घास भीग कर खराब हो रहा है। --------------
 
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