अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। इसे सरकारी तंत्र की लापरवाही ही कहेंगे की 30 पन्नों के पत्र को कर्मचारी व अधिकारी संभाल कर नहीं रख सके। ऐसे में कैसे लोग अपने आवेदन सरकारी अधिकारियों के पास करें, कैसे अपनी समस्याएं लेकर उनके पास जाएं। प्रार्थी ने इस पर लापरवाह कर्मचारियों व अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
गौरतलब है कि कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण की आड़ में गिराये गए मकान पर प्रार्थी पूर्व सैनिक मदनलाल शर्मा ने 19-3-2018 को 30 पन्नों का प्रमाण पत्रों सहित आवेदन पत्र तहसीलदार घुमारवीं को दिया था। इसमें प्रार्थी ने मकान को गिराने से पहले नियमानुसार निशानदेही का आवेदन किया था और उन प्रमाण पत्रों की छाया प्रतियों को जोड़ा था। उन्होंने बताया था कि यह मकान न तो रोड अलाइनमेंट प्लान में हैं, न निशानदेही में आता है लेकिन तहसीलदार कार्यालय घुमारवीं से प्रार्थी का यह पत्र गायब हो गया है।
इसका खुलासा प्रार्थी को आरटीआई से प्राप्त जानकारी से हुआ है। इस संबंध में प्रार्थी ने प्रथम अपीलीय अधिकारी एसडीएम घुमारवीं के समक्ष अपील दायर की थी, जिसमें जनसूचना अधिकारी ने लिखित में पुष्टि की थी कि यह पत्र सभी कार्यालयों में तलाशा गया है लेकिन कहीं नहीं मिला है। इस पर प्रार्थी ने एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
जबकि दूसरी और संबंधित कार्यालयों के कर्मचारियों ने यह पुष्टि की है कि यह पत्र वह स्वयं तहसीलदार घुमारवीं के पास ले गए थे। पत्र को तहसीलदार के टेबल पर रख दिया था, जब उसे दोबारा लेने के लिए गए तो वहां पर आवेदन पत्र नहीं मिला। इस पर घुमारवीं एसडीएम ने आदेश जारी किए हैं कि पत्र तलाश कर जानकारी मुहैया करवाई जाए। प्रार्थी का कहना है कि अपने आदेशों में कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने आवेदन कर एसडीएम से कहा है कि वह अपने आदेशों में कर्मचारियों के लिए समय सीमा निर्धारित करें।