अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। झंडूता में बीडीसी अध्यक्ष पद के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद भी भाजपा अध्यक्ष पद अपने नाम नहीं कर पाई। इस कारण झंडूता विस क्षेत्र में भाजपा की जम कर किरकिरी हुई है। वहीं लोक सभा चुनाव के ठीक पहले मिली इस प्रकार से करारी हार का असर आगामी चुनाव तक उठाना पड़ सकता है।
हालांकि बताया जा रहा कि अध्यक्ष पद के लिए भाजपा यहां लंबे समय से जोड़तोड़ कर रही थी लेकिन ऐन मौके पर जब बहुमत सिद्ध करने की बारी आई तो बाजी भाजपा के हाथ से चली गई। इस पूरे मामले के पीछे भाजपा की अपनी अंतर कलह को भी जोड़ कर देखा जा रहा है क्योंकि जिस प्रकार से भाजपा ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया उससे साफ था कि भाजपा पूरा गठजोड़ कर चुकी थी, बस औपचारिकता के रूप में वोटिंग होनी थी।
भाजपा तो यहां तक मान कर चल रही थी कि हो सकता है कि बिना वोटिंग के ही भाजपा के अध्यक्ष पर बात बन जाए लेकिन भाजपा की उम्मीद पर उस वक्त पानी फिर गया जब वोटिंग के बाद केवल मात्र भाजपा को 9 लोगों के ही मत मिल पाए।
गौर रहे कि झंडूता में विस चुनावों के समय से ही भाजपा में अंदरखाते गड़बड़ी चल रही है क्योंकि पूर्व विधायक रिखी राम कौंडल का टिकट काट कर वर्तमान विधायक जेरआर कटवाल को टिकट दिया गया। इसके बाद भाजपा के कई नेता इससे नाराज भी चल रहे थे। हालांकि जेआर कटवाल अपने दम पर चुनाव जो जीत गए लेकिन अभी भी भाजपा का एक धड़ा उन्हें स्वीकार नहीं कर पा रहा है।
अविश्वास प्रस्ताव लाने के बाद भी अध्यक्ष नहीं बना पाने का मामला भी इसी कारण से कहीं न कहीं प्रभावित जरूर हुआ है क्योंकि भाजपा पूरी तरह से सोच समझ कर अविश्वास प्रस्ताव लाई थी लेकिन उसमें वह चारों खानें चित्त हो गई है।