जंडौरी, पंजाब में डंपिंग साइट 1 पर 1,64,760 क्यूबिक, दबट साइट की क्षमता 42,170 क्यूबिक
सुरक्षा उपायों से बढ़ाई जा सकती है डंपिंग साइट की क्षमता
विस्थापित समिति की आरटीआई पर आरवीएनएल ने दिया जवाब
संवाद न्यूज एजेंसी
बिलासपुर। रेलवे विकास निगम ने निर्माण कार्यों से निकलने वाले मलबे के निपटान के लिए 16 मक डंपिंग साइटों को चिह्नित किया है। इन साइटों की क्षमता का सही आकलन नहीं किया गया है।
आरटीआई के तहत मिली जानकारी में निगम ने माना है कि डंपिंग साइटों की क्षमता को सुरक्षा उपायों से बढ़ाया जा सकता है। हालांकि मौके पर डंप किए मलबे का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। डंपिंग साइट्स और संभावित मलबे की मात्रा क्यूबिक मीटर में बताई गई है। इसमें जंडौरी, पंजाब में डंपिंग साइट एक पर 1,64,760 क्यूबिक, दबट मजारी हिमाचल में डंपिंग साइट दो पर 42,170 क्यूबिक, नंद बहल हिमाचल साइट तीन पर 2,09,770 क्यूबिक, धरोट साइट पर 2,08,410 क्यूबिक मलबा डंप किया है। इसके अलावा अन्य साइट्स बैहल, लखाला, थापना, और बिलासपुर स्टेशन पर भी मलबा डंप किया गया।
फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के महासचिव ने आरटीआई में इसके अलावा भी जानकारी मांगी थी। आरटीआई में गोबिंद सागर झील और इसके सहायक नदी-नालों की ढलान पर की डंपिंग के लिए सुरक्षा दीवारों की सामग्री और निरीक्षण से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, लेकिन रेल विकास निगम ने कहा है कि कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। डंपिंग साइट्स के निरीक्षण की रिपोर्ट्स और संयुक्त कमेटी की छायाप्रतियां भी उपलब्ध नहीं कराई हैं।
जन सूचना अधिकारी ने कहा है कि कुछ साइट्स की क्षमता स्थल और सुरक्षा उपायों के अनुसार बढ़ाई जा सकती है। डंपिंग साइटें गोबिंद सागर झील और उसके सहायक नालों के ढलान पर स्थित हैं। यह पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है और झील के जलस्तर और वन्यजीवों के लिए खतरा उत्पन्न कर सकता है। इन साइटों पर बिना वैज्ञानिक सुरक्षा के मलबा डंप करना विनाशकारी साबित हो सकता है।
समाधान की सख्त जरूरत : मदन
मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेलवे, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। डंपिंग साइटों की क्षमता का सही आकलन किया जाए। सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाया जाए। अवैध डंपिंग पर रोक लगाई जाए।
-मदन लाल शर्मा, महासचिव फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति