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बाल विवाह को बढ़ावा देने वाले को हो सकती है दो साल की जेल

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बिलासपुर। चाइल्ड लाइन इंडिया फाउंडेशन एवं मानव सेवा संस्थान चाइल्ड लाइन बिलासपुर 1098 के संयुक्त तत्वाधान में बाल विवाह रोको जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम क्रिसेंट पब्लिक स्कूल बिलासपुर मे किया गया जिसकी अध्यक्षता चाइल्ड लाइन बिलासपुर के समन्वयक रविंद्र कुमार ने की।
समन्वयक रविंद्र कुमार ने कहा कि बाल विवाह एक कुप्रथा है। यह प्राचीन काल में प्रचलित थी, जब लड़के-लड़कियों का विवाह बहुत ही कम उम्र में कर दिया जाता था। बाल विवाह केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में होते रहे हैं। बच्चे के माता-पिता या अभिभावक या कोई अन्य संगठन के सदस्य सहित कोई व्यक्ति जो बाल विवाह को बढ़ावा देने या अनुमति देने के लिए कोई कार्य करता है या लापरवाही से इसे रोकने में विफल रहता है। इस तरह के विवाह में शामिल होने या भाग लेने सहित, इसे दोषी ठहराए जाने पर 2 साल तक के कठोर कारावास या एक लाख रुपये या दोनों का जुर्माना हो सकता है।
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कम उम्र में मां बनने से लड़कियों के सेहत पर बुरा असर पड़ता है। वो बीमार रहने लगती हैं। उनके शरीर में बहुत से पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसलिए डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी लड़की को 18 वर्ष के बाद ही मां बनना चाहिए। इस मौके पर चाइल्ड लाइन से प्रवीणा कुमारी व टीम सदस्य बाबू राम, मीनाक्षी कुमारी, सुनिता एवं स्कूल अध्यापक मौजूद रहे।
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