अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण से निकल रहे मलबे को कंपनी की ओर से नदी व नालों में डंप किए जाने से मत्स्य उत्पादन पर संकट गहराने लगा है। मछुआरे परेशानी का सामना कर रहे हैं। पिछले एक माह से मछुआरे बैठकें कर शिकायत पत्र अपनी सहकारी समिति के प्रधानों के माध्यम से अवगत करवाने का विरोध दर्ज करवा रहे हैं।
मछुआरों का कहना है कि फोरलेन निर्माण कंपनी ने कंजरवेशन एक्ट 1980 का उल्लंघन करके सड़क निर्माण से निकली मिट्टी को जानबूझ कर झील में डंप कर दिया है जिससे मछली उत्पादन में भारी कमी आई हैं, वहीं भाखड़ा बांध को भी खतरा बढ़ गया है। इसके साथ ही पर्यावरण को भी खासा नुकसान हुआ है।
मत्स्य सहकारी सभा समिति धनी पारली, मातला सोसायटी, जोर सोसायटी, जबलू सोसायटी, दाड़ीबाड़ी सोसायटी, दौलाधार सोसायटी, बलघाड़ मत्स्य सहकारी सभा समिति, जबलू सहकारी सभा समिति, बड़ोल मत्स्य सहकारी सभा समिति, भाखड़ा मत्स्य सहकारी सभा समिति, बिंयुगली मत्स्य सहकारी सभा समिति आदि की बैठक नकराणा में हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान धर्मपाल ने की। बैठक में कहा गया कि कंपनी मछुआरों के नुकसान की भरपाई करें और वह पैसा उनके खाते में डाला जाए।
इस दौरान प्रधान, सचिव व मछुआरों में दिनेश कुमार, रणजीत कुमार, मनजीत, सीताराम, मैहताब, देशराज, बुद्धि सिंह, मस्तराम, मदनलाल, चमन, कर्म सिंह, पृथी सिंह, राकेश, ईश्वर, धर्मी देवी, यशपाल, विजय, जोगिंद्र, राजेश, पुरुषोत्तम, कमला देवी, दीप, जयसिंह, श्यामलाल, अशोक, बलवीर, संजू, सुखदेव, रमेश, हरदयाल, रामपाल, अमीचंद, सत्या देवी, लालसिंह, कुमारी किरण, प्रवीण, सत्या देवी, इंद्री देवी, राधा देवी, तिलकराज, रामलाल, जस्वीर सिंह, मस्तराम, श्यामलाल, लक्ष्मण दास, जगतराम, प्रेमलाल, सरोज कुमार, महेंद्र सिंह, नंदलाल आदि शामिल हुए।