घुमारवीं(बिलासपुर)। उपमंडल घुमारवीं में बंदरों के आतंक से सैकड़ों किसानों ने खेतीबाड़ी करना छोड़ दी है। हालत यह हो गई है कि किसान जो भी फसल तैयार करता है बंदर उसे उजाड़ देते हैं। ऐसे में अब किसानों में जमीन पर हल चलाना ही छोड़ दिया है जिससे सैकड़ों बीघा जमीन बंजर होने के कगार पर पहुंच चुकी है। हालांकि पिछले एक दशक से नेताओं को चुनाव के समय इन बंदरों की याद आती है। कई नेता तो बंदरों से राहत दिलाने के नाम पर विधानसभा भी पहुंचे लेकिन विधानसभा में पहुंचते ही नेताओं को किसानों की याद नहीं रहती। याद आती है तो फिर अगले चुनाव के समय।
बंदरों से निजात दिलाने के लिए क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय प्रशासन व जिला प्रशासन को भी कई बार ज्ञापन देकर अवगत करवाया। पर हर बार आश्वासनों के अलावा कुछ भी नहीं मिला। चुनावों के समय एक से बढ़कर एक वायदे लोगों के साथ किए जाते रहे हैं। पर सत्ता मिलने के बाद किसान को पूछने वाला कोई नहीं रह जाता जिससे क्षेत्र में स्थिति यह हो गई हैं कि पहले यह बंदर गांव में ही होते थे। पर अब शहर में भी देखे जा सकते हैं और लोगों का काफी नुकसान कर रहे हैं। हालत यह हो गई है कि लोग बंदरों के डर से अपने बच्चों को स्कूल भेजने तक से डरने लगे हैं।
- प्रदीप गुप्ता कहते हैं कि क्षेत्र में अधिकतर भूमि बंजर बन गई हैं क्योंकि लोगों ने इस उपजाऊ जमीन पर फसल लगाना बंद कर दी है। अगर कोई किसान खेती भी करते हैं तो उनकी फसल को बंदर उजाड़ दे रहे हैं।
-दीप कुमार ने कहा कि पहले यह बंदर खेतों में लगाई फसल को नष्ट करते थे। पर अब घर की छत पर रखा कोई भी सम्मान उड़ा लेते हैं जिससे बंदरों का आतंक दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। बंदर लोगों पर भी हमला कर रहे हैं।
-कांशी राम ने कहा कि बंदरों की तादाद क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा हो गई है। अगर बंदरों को घर की छतों पर खाने को कुछ भी मिला तो यह लोगों पर हमले करने से भी नहीं डरते हैं। नेता लोग चुनावों के समय बंदरों से निजात दिलाने के वायदे करते हैं लेकिन सत्ता मिलने पर लोगों की सुध कोई नहीं लेता।
-संजीत ठाकुर ने कहा कि सरकार और उसके नुमाइंदे हर बार चुनावों के समय बंदरों से निजात दिलाने का वायदा करते हैं। पर चुनाव जितने के बाद वह जल्दी ही अपना वायदा भूल जाते हैं तथा लोग अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं।
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लोगों के ज्ञापन सरकार को भेजे जाते हैं
उपमंडल घुमारवीं क्षेत्र से काफी लोगों व विभिन्न संस्थाओं के द्वारा ज्ञापन दिए गए हैं। हम उन ज्ञापनों को सरकार को भेज देते हैं। सरकार ही बंदरों के निजात के लिए उचित कदम उठाएगी। घुमारवीं क्षेत्र में बंदरों के द्वारा लोगों पर कुछ हमले किए गए हैं जिससे कुछ लोग घायल भी हुए हैं। इस सारे घटना क्रम को समय-समय पर उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया जाता रहता है ।
-शशीपाल शर्मा एसडीएम, घुमारवीं
भाजपा सरकार ने कही थी नीति बनाने की बात
जब कांग्रेस की सरकार थी तो समय-समय पर बंदरों को पकड़ कर दूसरे राज्यों में भेजा जाता था। पर उसका भी भाजपा समर्थित बजरंग दल ने विरोध किया। केंद्र में भाजपा सरकार ने भी नीति बनाने की बात कही जो आज तक धरातल पर नहीं आई हैं।
-राजेश धर्माणी, कांग्रेस पूर्व विधायक
यह मामला सरकार की देखरेख में है
यह मामला सरकार की देखरेख में है। सरकार बंदरों की नशबंदी के ऊपर कार्य कर रही हैं। सरकार किसानों की समस्या को ध्यान में रखकर जल्द इस मामले में और कड़े कदम उठाएगी।
-राजेंद्र गर्ग, स्थानीय विधायक