विक्रम सिंह ठाकुर
स्वारघाट(बिलासपुर)। वन विकास निगम स्वारघाट का टिंबर डिपो बंद होने के कगार पर पहुंच चुका है। अब प्रदेश वन विकास निगम ने उक्त टिंबर डिपो को चलाने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं क्योंकि उक्त डिपो में आमदनी कम है और खर्च अधिक हो रहा है। इस कारण इस डिपो का संचालन करना आसान नहीं रह गया है।
जानकारी के अनुसार गत ढाई माह से टिंबर डिपो स्वारघाट में लकड़ी की आपूर्ति नहीं हो पाई है जिस स्थान पर लकड़ी का स्टॉक एकत्रित करने के लिये बड़ा ग्राउंड बनाया गया है वह कई माह से खाली पड़ा हुआ। जबकि इससे पहले दूसरे जिलों से मंडी, हमीरपुर, सोलन व ऊना के जंगलों से हर माह स्वारघाट टिंबर डिपो स्वारघाट के लिए 20 से 25 ट्रक आते थे। स्वारघाट में लकड़ी एकत्रित करने के बाद उक्त लकड़ी की हर माह वन विकास निगम द्वारा बोली लगाकर नीलामी की जाती है जिसमें पंजाब, चंडीगढ़, हरियाणा व दिल्ली के व्यापारी भी भाग लेते हैं।
उक्त लकड़ी की नीलामी से प्रदेश वन विकास निगम को हर माह लाखों की आय प्राप्त होती है लेकिन अब लकड़ी नहीं आने आर्थिक संकट खड़ा हो चुका है। वन विकास निगम स्वारघाट डिपो में आज के समय में एक कार्यवाहक रेंजर सहायक प्रबंधक समेत दो डिप्टी रेंजर, दो फोरेस्ट गार्ड व तीन चौकीदार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन सभी कर्मचारियों की सैलरी पर होने वाले खर्च प्रदेश वन निगम के आला अधिकारियों को अब दुखने लगने लगा है।
जानकारी के अनुसार स्वारघाट के हिम काष्ठ विक्रय भंडार से हर साल होने वाली आमदनी में कमी दर्ज की जा रही है। 2013-14 वित्तीय वर्ष में हर महीने 25 लाख की सालाना आय प्राप्त होती थी जो 2014-15 में घटकर 24 लाख पर आ गई। इसके साथ ही 2015-16 में 19 लाख तथा 2016-17 में घटकर 15 लाख प्रति वर्ष तक आ चुकी है। जबकि वन विकास निगम को यहां पर तैनात कर्मचारियों का खर्च 50 लाख सालाना पड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश वन विकास निगम शिमला में कार्यरत प्रबंध निदेशक बीडी सुएल ने उपरोक्त पुष्टि करते हुए कहा कि टिंबर डिपो स्वारघाट घाटे में चल रहा है। आने वाले समय में इसे शिफ्ट किया जा सकता है।
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