फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

श्रमिकों को फरमान जारी मीडिया में गए तो होगी कार्रवाई

विज्ञापन
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो

विज्ञापन

बरमाणा(बिलासपुर)। एसीसी प्रबंधन वर्ग ने फैक्टरी में ठेकेदारों के अधीन काम करने वाले श्रमिकों को मीडिया में न जाने का फरमान जारी किया है। फरमान में साफ कहा गया है कि कंपनी के खिलाफ जो भी मीडिया में कुछ बोलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं श्रमिक वर्ग ने कंपनी के फरमान का कड़ा विरोध किया है।

कंपनी के वरिष्ठ महा प्रबंधक आरके ठाकुर ने नोटिस जारी कर श्रमिकों को चेतावनी दी कि अगर कोई भी श्रमिक कंपनी अधिकारियों की लिखित अनुमति के बिना मीडिया में गया तो इसे कंपनी के नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। अगर कोई श्रमिक इस नियम का तोड़ता है तो कंपनी के अधिकारी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है।
विज्ञापन

नोटिस जारी होने के बाद से श्रमिकों में एसीसी प्रबंधन वर्ग के खिलाफ गुस्सा उमड़ा हुआ है। श्रमिकों ने कंपनी द्वारा जारी किए नोटिस का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि कंपनी प्रबंधन का रवैया तो अंग्रेजों के कार्यकाल से भी बदतर होता जा रहा है।

श्रमिकों ने आरोप लगाए कि कंपनी के पैकिंग हाउस में काम कर रहे श्रमिकों की हालत इतनी खराब है कि उन्हें धूल और मिट्टी से होने वाली कई प्रकार की बीमारियों का शिकार होना पड़ रहा है। पैकिंग हाउस में इतनी धूल है कि आंखों पर लगे चश्मे से 2 मिनट में दिखना बंद हो जाता है। शरीर धूल से लबालब हो जाता है। धूल श्रमिकों के अंदर प्रवेश कर उन्हें कई तरह की बीमारियों का शिकार बनाती है। 35 वर्षों से कंपनी धूल को कंट्रोल करने का कोई कदम नहीं उठा रही है।

श्रमिकों का आरोप है कि कंपनी ने शारीरिक रूप से स्वस्थ वर्करों को एआरएस देकर घर भेजा है। जबकि बीमारी से ग्रस्त अभी भी कंपनी में रोजी-रोटी के लिए काम कर रहे हैं। उद्योग में धूम्रपान वर्जित है। इसके चलते कंपनी के अधिकारियों के लिए स्मोकिंग जोन बनाया गया है। लेकिन श्रमिकों के लिए नहीं बनाया है। आरोप है कि श्रमिकों को परेशान किया जाता है। पंचिंग मशीन के साथ प्रबंधन छेड़छाड़ करता है।

एसीसी के श्रमिकों ने प्रदेश सरकार से मांग की कि कंपनी में सुरक्षा को लेकर प्रबंधन की कथनी और करनी में दिन रात का अंतर है। शिकायत कर्ता श्रमिकों को विश्वास में लेकर सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाए। श्रमिकों का आरोप है कि आज तक जितनी भी जांच हुई है वो प्रबंधन वर्ग के मिल-जुले लोगों ने की है। यह ही श्रमिकों को मंजूर नहीं है। एसीसी में कार्यरत यूनियन और प्रबंधन वर्ग जांच का हिस्सा नहीं होने चाहिए। शिकायत कर्ताओं से पूछताछ करते समय वीडियोग्राफी की जाए ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।

श्रमिकों इंद्र सिंह, देवी राम ठाकुर, बलदेव ठाकुर, पवन कुमार, सतीश शर्मा, बाबू राम, संतोखा सिंह, सोहन लाल शर्मा, बाबू राम, राजेश कुमार, नंद किशोर, रूप लाल, लेख राम, बालक राम, राकेश कुमार, लाला राम, राजकुमार, मेहर चंद, श्याम लाल, शेर सिंह, ललित कुमार, प्रकाश चंद, राकेश कुमार, श्याम लाल, सीता राम, कमल सिंह, विजय कुमार, किशोरी लाल, राजेंद्र कुमार, बलबीर, बाबू राम, नंद लाल, जगदीश और अमर सिंह सहित अन्य कंपनी की अनियमितताओं की जांच के लिए सरकार से मांग की है।
विज्ञापन


श्रम कानून का उल्लंघन
25 वर्ष से ट्रेड यूनियन के लिए काम कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता भगत सिंह वर्मा का कहना है कि कंपनी का नोटिस श्रम कानून का हनन है। श्रम कानून श्रमिकों को अधिकार देता है कि वो अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए मीडिया का सहारा ले सकते हैं। इसके लिए उन पर कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता है।
इस बारे में एसीसी के एचआर मैनेजर हितेंद्र कपूर ने कहा कि इस संबंध में वह कुछ भी बोलने को अधिकृत नहीं हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें