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गोबिंद सागर झील में बिना समयसारिणी के लगाए जा रहे जाले

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गोबिंद सागर झील में बिना समयसारिणी के लगाए जा रहे जाले
सुबह नौ बजे के बाद से झील में चलना शुरू हो जाती हैं बोटें
जालों के बोट में फंसने से बना रहता है हर समय हादसों का खतरा
खेमराज शर्मा
बिलासपुर। गोबिंद सागर झील में बिना समयसारिणी के जाले लगाए जा रहे हैं जिससे मछली उत्पादन से लेकर गोबिंद सागर झील में चलने वाली बोटों पर इसका असर पड़ रहा हैं। मछली पकड़ने के लिए लगाए गए जालों से हर समय हादसों का खतरा बना रहता है।
ऐसा नहीं है कि गोबिंद सागर झील में जालों को लगाने का समय निर्धारित नहीं किया गया है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की माने तो गोबिंद सागर रेजरवायर में मछुआरों के जाले लगाने का समय निर्धारित किया गया है जिसमें शाम पांच बजे के बाद मछुआरों को गोबिंद सागर झील में जाले लगाने को समय निर्धारित किया गया है, जबकि सुबह नौ बजे से पहले इन जालों को निकालने का समय निर्धारित किया गया है लेकिन स्थिति यह है कि झील में मछलियों को पकड़ने के लिए जाले हर समय लगे हुए दिखाई दिए जाते हैं। इन जालों से यहां से गुजरने वाले बोटों में फंसने से हादसों को होने का खतरा बना रहता है।
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वहीं जब झील में तूफान चला होता है तो इन जालों से हादसों के होने का खतरा ज्यादा बना रहता है। कुछ दिन पहले भी यहां पर एक जाला बोट में फंस गया था। इसके बाद बोट चालक को पानी में उतर कर जाले को निकाला था। बोट मालिकों का भी कहना है कि जब भी जालों के ऊपर से बोट गुजरते हैं तो हर समय ही डर बना रहता है कि कोई जाला बोट में न फंस जाए। इस समय गोबिंद सागर झील में 50 से ज्यादा बोटें चलती हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शहर से दूसरी तरफ जाते हैं। इनमें स्कूली बच्चों सहित सरकारी कर्मचारी, बुजुर्ग, महिलाएं व बीमार लोग होते हैं। ऐसे में जालों के बोट में फंस जाने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इस बारे में सहायक निदेशक सुशील जनारथा का कहना है कि इस बारे में अधिकारियों से बात की जाएगी, अगर ऐसा है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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इनसेट--
बिलासपुर में गोबिंद सागर पर करीब 3 हजार के करीब मछुआरे निर्भर हैं। उक्त लोग गोबिंद सागर में विभिन्न स्थानों पर जाल लगाते हैं। इसके अलावा कई मछुआरे बिना पंजीकरण के भी जिला में हैं।
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...खेमराज शर्मा।
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