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बरसात से प्रभावितों को जल्द मिले मुआवजा: राम लाल

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बरसात से प्रभावितों को जल्द मिले मुआवजा : राम लाल
बोले, कहां गए केंद्रीय मंत्री के 60 हजार करोड़ रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
स्वारघाट(बिलासपुर)। प्रदेश कांग्रेस के महासचिव व नयनादेवी विधानसभा के विधायक रामलाल ठाकुर ने कहा है कि भारी बरसात के कारण प्रभावितों को प्रदेश सरकार की ओर से जल्द से जल्द आर्थिक मद्द प्रदान की जानी चाहिए। विधायक रामलाल ठाकुर ने पर्यटन विभाग के होटल हिल टॉप स्वारघाट में पत्रकार वार्ता में यह बात कही।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों से पहले हिमाचल राज्य के दौरे पर आकर केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री ने घोषणा में कहा था कि हिमाचल के नेशनल हाईवे सड़कों के निर्माण के लिए 60 हजार करोड़ रुपये की धनराशि जारी की जा रही है। जबकि केंद्रीय भूतल मंत्री की उपरोक्त घोषणा व प्रदेश सरकार के दावे भी जमीनी हकीकत से दूर दिखाई पड़ रहे हैं। केवल मात्र कुछ सड़कों के निर्माण की डीपीआर के आदेश हुए हैं बाकी जमीन पर कुछ भी नहीं है।
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रामलाल ठाकुर ने कहा कि कीरतपुर साहिब से नेरचौक नेशनल हाईवे का निर्माण कार्य पिछले लंबे अरसे से बंद पड़ा हुआ है। फोरलेन निर्माण कार्य में लगे हुए ठेकेदार व छोटे ठेकेदार कार्य छोड़ कर भाग गए हैं क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार की तरफ से फोरलेन निर्माण के लिए बजट समय पर नहीं मिल पा रहा है।
कहा कि गरामोड़ा से लेकर बिलासपुर तक पुराने नेशनल हाईवे का हाल बेहाल हो गया है। उक्त सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों को मालूम नहीं हो रहा है कि सड़क पर गड्ढ़े पड़े हुए हैं या फिर गड्ढों में सड़क है। उक्त सड़क के खराब होने के कारण जगह-जगह वाहन खराब हो रहे हैं जिस कारण आए दिन कई घंटे तक लोगों को जाम में फंसना पड़ रहा है। सड़क खराब होने के कारण प्रदेश की मंडियों से सब्जी उत्पाद व सेब लेकर पंजाब जाने वाले हमारे व्यापारियों को भी परेशान होना पड़ रहा है। बावजूद इसके भी नेशनल हाईवे, प्रदेश व केंद्र सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
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कहा कि स्वाहण-जनाली-पनगवाना संपर्क सड़क पर 76 लाख खर्च करके ठेकेदार को लाभ पहुंचाया गया लेकिन उक्त ठेकेदार ने संपर्क सड़क का बेड़ा गर्क कर दिया है। आज उक्त सड़क पर दोपहिया वाहन चलाने में भी मुश्किल हो गई है। हैरानी इस बात की है कि बिना वन विभाग की मंजूरी के उक्त सड़क को हरी झंडी कैसे दी गई है। उक्त मामले की उचित जांच कराई जाए। नहीं तो स्वाहण, टरवाड़ के ग्रामीण कैंचीमोड़ में 10 दिन बाद चक्का जाम करने को मजबूर होंगे।
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