बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के दौरान वन भूमि पर अवैध रूप से डंप किए गए मलबे को हटाने को लेकर क्या कदम उठाए गए इस संबंध में अरण्यपाल ने डीएफओ से जवाब मांगा है। अरण्यपाल कार्यालय से जारी पत्र में डीएफओ को सात दिन में जवाब देने को कहा है। उक्त कार्रवाई कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन विस्थापित प्रभावित समिति की शिकायत पर की गई है।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन निर्माण के दौरान कंपनी ने वन विभाग की जमीन पर मलबा डाला था। हालांकि कुछ एक मामलों में वन विभाग ने कंपनी को जुर्माना लगाया था। लेकिन मौके से मलबा नहीं उठाया गया। जबकि कंपनी ने बाद में उक्त स्थान पर फिर से मलबा डालना जारी रखा और उसे डंपिंग साइट ही बना डाला। इसके बाद समिति की ओर से अरण्यपाल को शिकायत देकर तय समय में उक्त मामले में कार्रवाई की मांग की गई। जिस पर कार्रवाई करते हुए अरण्यपाल ने डीएफओ बिलासपुर को पत्र जारी कर पूरे मामले में सात दिन के अंदर स्थिति साफ करने को कहा है। डीएफओ को बताना होगा मौके पर से मलबा उठाने के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं। समिति का कहना है कि पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई कंपनी से करवाई गई है। लेकिन, मौके से मलबा अभी तक नहीं उठाया गया है। जोकि जुर्माना लगाने के साथ उठना चाहिए था। इसके बाद अरण्यपाल ने डीएफओ को पत्र जारी किया है।
समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार, महासचिव मदन लाल शर्मा और सीता राम ने बताया कि शिकायत के बाद अरण्यपाल ने समिति के पदाधिकारियों के साथ बैठक की और पूरे मामले को सुना। समिति ने बताया कि कई साइटें ऐसी हैं जिस पर वन विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
गौर रहे कि जिला प्रशासन की एक संयुक्त कमेटी ने भी जांच में पाया है कि 70 नदी, नालों में अवैध रूप से मलबा डाला गया है। इससे मछली उत्पादन में भी गिरावट आई है। एसडीएम ने 20 दिनों के अंदर कंपनी को मलबा हटाने के आदेश दिए थे। लेकिन, अभी तक इस मामले में भी कंपनी की ओर से कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।