बिलासपुर। जिला अस्पताल में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। जहां विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है, वहीं अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन न होने से मरीजों की मर्ज और बढ़ गई है। इसके बावजूद भी सरकार और जनप्रतिनिधियों द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। पूर्व सरकार के समय डॉक्टरों लिए हाय-हाय करने वाले भाजपा नेता अब अपनी सरकार के समय वाह-वाह कर रहे हैं। अब किसी को मरीजों की मर्ज की चिंता नहीं है। लोगों की उम्मीद थी कि भाजपा सरकार आते ही सुधार होगा। लेकिन भाजपा के राज में भी राम राज्य ऐसा आया कि लोगों का मर्ज बढ़ता ही गया। हालांकि पूर्व में कांग्रेस सरकार के राज में आमरण अनशन तक किए गए। अब सरकार को बने पांच महीने का समय होने वाला है, लेकिन अब वह आंदोलनकारी भी अपनी सरकार के स्वर में स्वर मिलाते हुए खामोश बैठे हैं। बड़े-बड़े नेता मंच से भाषण देते हैं कि जल्द डॉक्टर आएंगे।
उधर, एमएस डॉ. राजेश आहलुवालिया का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के कारण उन्हें कई बार मजबूरी में खुद ऑपरेशन करने पड़ रहे हैं। इस संबंध में उच्च अधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
जिला अस्पताल की हालत ऐसी हो गई है कि सर्जन न होने के कारण एमएस का चार्ज संभाल रहे डॉ. राजेश आहलुवालिया को ऑपरेशन करने पड़ रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल की क्या हालत है।
सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिला अस्पताल में 25 में से 12 डॉक्टरों के पद रिक्त चल रहे हैं। इनमें सर्जन और मेडिसन के डॉक्टर भी शामिल हैं। ऐसे में मरीजों की हालत क्या होती होगी अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिला अस्पताल में सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड तक की सुविधा लोगों को नहीं मिल रही है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को पेश आ रही है। जिन्हें मजबूरी में निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर अल्ट्रासाउंड करवाने पड़ रहे हैं। जबकि सरकारी अस्पताल में निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा है।
पूर्व विधायक बंबर ठाकुर कहते हैं कि पूर्व में अस्पताल में बेहतर स्थिति थी। उस समय भाजपा ने जमकर हल्ला किया। लेकिन अब अस्पताल में मरीजों को कोई भी उपचार नहीं मिल रहा है, अब भाजपा नेता कहां सो रहे हैं।
वर्तमान भाजपा विधायक सुभाष ठाकुर का कहना है कि मामला सरकार के ध्यान में है। अव्यवस्था विरासत में मिली है।, सुधार किया जा रहा है। जल्द ही जिला अस्पताल में डॉक्टरों की नियुक्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाना सरकार की प्राथमिकता है।