रितेश गुलेरिया
बिलासपुर। कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण कार्य में वन विभाग की बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। वन विभाग ने स्वयं माना कि इतने बड़े निर्माण के दौरान भी उनके किसी अधिकारी और कर्मचारी ने पेड़ कटान का कोई निरीक्षण नहीं किया। जबकि निर्माण के दौरान वन कटान के लिए तीन लॉट तैयार किए गए थे जिसमें वन भूमि, निजी और सरकारी भूमि के रूप में बांटा गया था। इसमें 500 बीघा के करीब जमीन थी जिसमें अकेले वन विभाग के सड़क निर्माण के लिए 26660 पेड़ चिहिन्त किए गए थे जिनमें वन विभाग की जमीन पर से 11490 पेड़ काटे गए हैं। जबकि निजी और सरकारी जमीन में कटे हजारों पेड़ों की भी वन विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है जिससे साफ है कि वन विभाग ने जो भी फाइलें साइन की वह बंद कमरों में की हैं।
उल्लेखनीय है कि फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने इस संबंध में शिकायत दर्ज की थी की पेड़ कटान के दौरान किस-किस स्तर के अधिकारियों के निरीक्षण में पेड़ काटे गए।
इस संबंध में हालांकि पहले डीएफओ बिलासपुर की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई जिसके बाद इस संबंध में अरण्यपाल आरएस पटियाल ने आरटीआई की अपील की सुनवाई के दौरान डीएफओ को सही जानकारी मुहैया करवाने के आदेश दिए। इस पर अब डीएफओ सरोज भाई पटेल ने जानकारी दी है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान कोई भी वन विभाग का अधिकारी, कर्मचारी मौके पर निरीक्षण के लिए गया की नहीं। यह जानकारी डीएफओ ने 13226 दिनांक 50.03.2019 को दी है।
इनसेट...
क्या है नियम
नियम अनुसार वन विभाग, सरकारी जमीन और निजी जमीन के कटाने जाने वाले पेड़ों का अलग अलग लॉट/क्षेत्र बनाता है जिसमें 25 फीसदी पेड़ों का निरीक्षण आरएफओ, 15 फीसदी का एसीएफ और दस फीसदी डीएफओ और दो फीसदी का निरीक्षण अरण्यपाल को करना होता है लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिसे वन विभाग ने स्वीकार किया है।