फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वायदे के बाद भी बंदरों की समस्या से नहीं मिली निजात

विज्ञापन
विज्ञापन
घुमारवीं (बिलासपुर)। उपमंडल में 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने बंदरों की समस्या से किसानों को निजात दिलाने की घोषणा की थी। लेकिन, चुनाव के बाद कांग्रेस सत्ता में आ गई। लेकिन, किसानों को बंदरों की समस्या से निजात नहीं मिल पाई। बंदरों से परेशान किसानों ने सैकड़ों बीघा जमीन पर खेतीबाड़ी करनी छोड़ दी। इसका परिणाम यह है कि आज सैकड़ों किसानों पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
विज्ञापन


उल्लेखनीय है कि 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार पर किसानों को बंदरों की समस्या से निजात दिलाने में नाकाम रहने का आरोप लगाया था। बड़े-बड़े होर्डिंग और विज्ञापन के माध्यम से इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश की थी। इसमें कांग्रेस सफल भी रही। लेकिन, सत्ता में आने के बाद किसानों के साथ किए वायदे को भूल गए। हालांकि पूर्व में भाजपा ने भी कांग्रेस पर बंदरों को मैदानी क्षेत्रों में छोड़ने का आरोप लगाया था।

किसानों की मानें तो सरकारें बदलने के बावजूद स्थिति सुधरने की बजाये खराब होती जा रही है। क्षेत्र के किसानों प्रकाश चंद, बंसी राम, जगतराम, दीनानाथ, जगरनाथ, रूपलाल, रतन लाल, ज्ञान चंद, सुरेश ठाकुर, दीवान चंद, निक्का राम, पुरुषोत्तम, उत्तम चंद, बृज लाल आदि ने कहा कि गेहूं की बिजाई का समय आ गया है। बंदरों के झुंड खेतों पर धावा बोलकर बीज तक को खा जाते हैं। यही नहीं जो फसल तैयार होती है उसे लावारिस पशु तबाह कर देते हैं। इससे परेशान होकर खेतीबाड़ी छोड़ने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


विधायक राजेश धर्माणी ने कहा कि समस्या गंभीर है। कांग्रेस सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री खेत संरक्षण कार्यक्रम के तहत लोगों को खेतों की फेंसिंग के लिए 80 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया है। बंदरों की नसबंदी के साथ ही जंगलों में फलदार पौधे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए कृतसंकल्प हैं।

उधर, मंडल महासचिव सुरेश ठाकुर ने कहा कि यह मुद्दा भाजपा के एजेंडे में मुख्य मुद्दों में शामिल है। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता महेंद्र धर्माणी का कहना है कि कांग्रेस ने घुमारवीं विस क्षेत्र में किसानों को बंदरों से राहत दिलाने का वायदा चुनावों में किया था। लेकिन, अपना वायदा पूरा करने में असफल रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें