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सुर्खियों में रहा स्वास्थ्य विभाग का कार्य साल भर

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बिलासपुर। स्वास्थ्य विभाग वर्ष 2018 में डेंगू मामलों को लेकर सुखिर्यों में रहा। एक तरफ जहां विभाग डेंगू को रोकने के लिए प्रयास करते जा रहा था, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में डेंगू के आंकड़े आसमान छूने को तैयार हो गए थे। गमीनत यह रही कि सर्दी शुरू होने के चलते ये मामले अपने आप कम हो गए। अगर कहीं गर्मियों का सीजन होता तो डेंगू न जाने कितना विकराल रूप धारण करता। डेंगू के मामलों को लेकर बिलासपुर जिला पूरे प्रदेश भर में प्रथम स्थान पर है। इसके चलते बिलासपुर अस्पताल साल भर सुखिर्यों में ही रहा। क्योंकि यहां पर आए वैज्ञानिक सहित चिकित्सकों ने भी माना की अगर समय रहते रोकथाम कर ली जाती तो इतने मामले यहां पर नहीं आते। डेंगू से अभी तक प्रदेश भर में तीन मौतें हो चुकी हैं। इसके चलते एक व्यक्ति बिलासपुर, एक डैहर जिला मंडी और एक सोलन जिला का है।
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चिकित्सकों का हमेशा रहा टोटा
क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर चिकित्सकों की कमी को लेकर हमेशा विवादों में रहा। बिलासपुर अस्पताल पूरे प्रदेश में एक मात्र ऐसा जिला है, जहां पर सबसे ज्यादा चिकित्सकों की कमी है। हालांकि कुछ समय यहां पर चिकित्सकों की तैनाती तो हुई, लेकिन अब धीरे-धीरे फिर से चिकित्सकों के तबादले होना शुरू हो गए हैं।
मंत्री ने एमएस को किया था सम्मानित
प्रदेश सरकार की ओर से शुरू किए गए कायाकल्प कार्यक्रम में गेंहड़वी पीएचसी ने जिला स्तर में प्रथम स्थान हासिल किया था। इसके चलते यहां पर तैनात चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश आहलुवालिया को प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री विपिन परमार की ओर से शिमला में सम्मानित किया गया था।
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डेंगू प्रभावित राज्यों में हिमाचल चौथे नंबर पर
डेंगू के मामलों में पूरे भारत में हिमाचल चौथे नंबर पर पहुंच गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की 2018 रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सूबे में डेंगू का वायरस तेजी से फैल रहा है। यह पहली दफा है कि हिमाचल में इस साल 4 हजार के करीब डेंगू के मामले सामने आए हैं।
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