अमर उजाला ब्यूरो
घुमारवीं(बिलासपुर)। न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट नंबर दो उपासना शर्मा की अदालत ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक कुठेड़ा की शिकायत पर आरोपी श्यामलाल पुत्र संतराम निवासी कुठेड़ा को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने दोषी करार देते हुए आरोपी को 3 माह के कारावास और 6 लाख बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता बैंक को अदा करने के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ता बैंक के अधिवक्ता संजीव कुमार ने बताया कि राम किशोर नामक व्यक्ति ने 19 फरवरी 2009 को शिकायतकर्ता बैंक शाखा से 5 लाख का कैश क्रेडिट लोन चांदनी जनरल स्टोर कुठेड़ा के नाम पर लिया था। इसमें आरोपी गारंटर था। ऋणी द्वारा तय शर्तों के अनुसार लोन की किश्त अदा न करने पर 25 जुलाई 2009 को ऋणी को बैंक द्वारा डिफॉल्टर घोषित कर दिया था।
इस पर बैंक द्वारा ऋणी व गारंटर के विरुद्ध सरफेसी अधिनियम के तहत रिकवरी कार्रवाई शुरू की जिस पर आरोपी ने राम किशन का गारंटर होने के चलते 5 लाख का चेक शिकायतकर्ता बैंक को दिया जो खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस हो गया। इस पर शिकायतकर्ता बैंक द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से आरोपी को नोटिस दिया गया लेकिन निर्धारित समय सीमा में देय राशि अदा न करने पर शिकायतकर्ता बैंक ने आरोपी के खिलाफ अदालत में शिकायत दर्ज की। अदालत ने आरोप सिद्ध होने पर आरोपी को दोषी करार देते हुए 3 माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई तथा दोषी को 600000 बतौर हर्जाना शिकायतकर्ता बैंक को देने के आदेश दिए।
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