बिलासपुर। ग्रामीण डाक सेवक मंगलवार को अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस कारण मंगलवार को जिला के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में डाक बांटने का कार्य पूरा नहीं हो पाया। इससे आम लोगों के पास डाक नहीं पहुंच पाई।
मंगलवार को जिलाभर से डाक सेवक मुख्य डाकघर बिलासपुर के प्रांगण में एकत्रित हुए और केंद्र सरकार व डाक विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। डाक सेवकों की हड़ताल के चलते जिले के 26 उप डाकघर और 150 ग्रामीण डाकघर प्रभावित हुए हैं।
अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ के मंडल प्रधान सोहन सिंह व मंडल सचिव बूटा राम ने बताया कि डाक विभाग ने नियमित डाक कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2016 से भुगतान कर दिया है। जबकि डाक महकमे की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले ग्रामीण डाक सेवकों के वेतनमान निर्धारण करने के लिए बैठाई गई कमलेश चंद्रा कमेटी की रिपोर्ट को ढाई साल बाद भी लागू नहीं किया जा रहा है। इस कारण ग्रामीण डाक सेवक पुराने वेतनमान पर काम कर रहे हैं।
जबकि महंगाई सातवें आसमान पर पहुंच गई है। कमेलश चंद्रा रिपोर्ट में ग्रामीण डाक सेवकों के वेतन में बढ़ोतरी करने का सुझाए दिया गया है। लेकिन, ढाई साल का लंबा अर्सा बीत जाने के बाद भी कमेलश चंद्रा रिपोर्ट को डाक विभाग व भारत सरकार द्वारा लागू नहीं किया जा रहा है। भारत सरकार व डाक विभाग के उदासीन रवैये से खफा होकर देश, प्रदेश व जिला बिलासपुर के समस्त डाकघरों में कार्यरत ग्रामीण डाक सेवक कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हैं। विक्रम ठाकुर, शशि पाल, भूरी सिंह, रतन लाल, जोगिंद्र पाल, भगत सिंह, चुनी लाल, देवराज, सोहन सिंह, विजय सिंह, अमर सिंह, कुलदीप कुमार, सूरज, शिव राम का कहना है कि ग्रामीण डाक सेवकों से केंद्र सरकार व डाक विभाग द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। इस कारण पूरे देश के ग्रामीण डाक सेवक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इससे सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में आएगी। वहीं विभिन्न परीक्षाओं के रोलनंबर भी उम्मीदवारों तक पहुंच पाना मुश्किल होंगे।