बिलासपुर। किरतपुर-नेरचौक फोरलेन निर्माण के समय वन भूमि में अवैध रूप से की गई डंपिंग को वन विभाग ने एनएचएआई को उठाने के आदेश दिए हैं। वन विभाग ने अपने आदेश में कहा कि फोरलेन निर्माण के दौरान एनएचएआई के अधीन कार्य कर रही कंपनियों ने विभिन्न स्थानों पर अवैध रूप से मलबा डंप कर रखा है। जिसको लेकर किरतपुर-नेरचौक फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति ने कई बार शिकायत की। जिसके बाद एसडीएम की अध्यक्षता में एक कमेटी का भी गठन किया गया। जिसमें पाया गया था कि 71 स्थानों जिसमें नदी, नाले, वन भूमि और गोबिंदसागर शामिल है, में अवैध डंपिंग पाई गई थी। जिसके बाद से लगातार समिति वन विभाग से मांग कर रही थी कि एनएचएआई और काम कर रही कंपनी को अवैध रूप से डंप किए गए मलबे को हटाने के आदेश दिए जाएं। क्योंकि मंडी और कुल्लू में वन विभाग पहले ही इस संबंध में आदेश जारी कर चुका है।
हालांकि लंबे समय तक टालमटोल करने के बाद अब इस संबंध में डीएफओ सरोज भाई पटेल ने एनएचएआई को आदेश दिए हैं कि मलबा हटाया जाए। अगर मलबा नहीं हटाया गया तो यह भी कहा गया है कि उसके बाद नियम अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इधर, इस संबंध में फोरलेन विस्थापित एवं प्रभावित समिति के उपप्रधान राकेश कुमार, चिंता देवी, बलदेव दास, जगतराम, सीताराम, महासचिव मदन लाल शर्मा का कहना है कि वन विभाग ने बार-बार शिकायत करने के बाद 6 साल में केवल अब एक नोटिस जारी किया। विडंबना है कि उस में मलबा उठाने के लिए कोई समय तय नहीं किया है। जिससे एनएचएआई, कंपनी और वन विभाग की मिलीभगत की ओर भी संदेह हो रहा है।