सर्वे के दौरान सुरंगों की लंबाई, भूगर्भीय स्थिति, ट्रैक की एलाइनमेंट और पुलों के संभावित स्थानों का विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। हिमालयी क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए रेललाइन का बड़ा हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा। इससे पहाड़ों की अधिक कटाई से बचाव होगा और बर्फबारी व भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी रेल संचालन सुरक्षित और सुगम बनाया जा सकेगा।
बैहना क्षेत्र में सर्वे टीम के पहुंचने पर स्थानीय लोगों में भी परियोजना को लेकर उत्सुकता दिखी। लोग मौके पर पहुंचकर सर्वे कर्मचारियों से प्रस्तावित रेलवे स्टेशन, ट्रैक और सुरंगों के बारे में जानकारी लेते रहे। रेल बिलासपुर-मनाली-लेह परियोजना को देश की सबसे महत्वपूर्ण सामरिक रेल परियोजनाओं में गिना जा रहा है। इसके पूरा होने से लद्दाख तक हर मौसम में रेल संपर्क स्थापित होगा और सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आवाजाही के साथ पर्यटन एवं स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। फाइनल सर्वे कर रही कंपनी के सर्वेयर ने बताया कि समूची रेल लाइन का सर्वे चालीस दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। मौसम खराब रहने की सूरत में यह अवधि बढ़ सकती है।