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भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन: करोड़ों की देनदारी बकाया, प्रभावित होने लगा काम; तीन स्टेशन भवनों के टेंडर भी रोके

Sun, 14 Dec 2025 10:12 AM IST
अंकेश डोगरा सरोज पाठक, बिलासपुर।

सार

भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन परियोजना में ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों का भुगतान रुक गया है। अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से बताया गया है कि प्रदेश सरकार ने परियोजना में अपना निर्धारित वित्तीय हिस्सा अब तक जमा नहीं किया है।
 
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भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन परियोजना वित्तीय संकट में है। ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों का भुगतान रुक गया है। इससे काम प्रभावित होने लगा है। नाराज ठेकेदारों ने कई स्थानों पर निर्माण रोक दिया है। रेलवे बोर्ड की ओर से रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को किए जाने वाला भुगतान पिछले कुछ समय से बंद पड़ा है।

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अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मौखिक रूप से बताया गया है कि प्रदेश सरकार ने परियोजना में अपना निर्धारित वित्तीय हिस्सा अब तक जमा नहीं किया है। जब तक राज्य सरकार की ओर से राशि जारी नहीं होती, तब तक केंद्र की ओर से भुगतान संभव नहीं है। इस संबंध में अभी तक रेल मंत्रालय की ओर से आरवीएनएल को कोई लिखित दिशा-निर्देश या औपचारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

भुगतान रोके जाने से आरवीएनएल के सिर पर करोड़ों रुपये की देनदारी पेंडिंग हो गई है। इसका सीधा असर काम कर रहे ठेकेदारों पर पड़ रहा है। वर्तमान में रेललाइन परियोजना में तीन विभाग सिविल, इलेक्ट्रिकल और सिग्नल एंड कम्युनिकेशन काम कर रहे हैं। तीनों विभागों की ही करोड़ों की पेमेंट रुकी है। 

इस संकट का असर केवल मौजूदा निर्माण कार्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आगामी विकास योजनाएं भी इससे प्रभावित हो गई हैं। आरवीएनएल को बिलासपुर स्टेशन भवन, पहाड़पुर स्टेशन भवन और जकातखाना स्टेशन भवन के लिए बड़े टेंडर जारी करने थे। बजट उपलब्ध न होने के कारण इन सभी टेंडर को फिलहाल होल्ड पर डाल दिया गया है। इससे परियोजना की समय सीमा और आगे बढ़ने की आशंका है। राज्य सरकार की भूमिका का असर भूमि अधिग्रहण पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बध्यात से आगे बैरी तक रेल लाइन के लिए आवश्यक जमीन का अधिग्रहण अब तक पूरा नहीं हो पाया है। 

भूमि अधिग्रहण में देरी के चलते इस हिस्से में कार्य शुरू होना संभव नहीं हो पा रहा, जिससे पूरी परियोजना की प्रगति बाधित हो रही है। यदि शीघ्र ही राज्य सरकार अपना हिस्सा जारी नहीं करती और भुगतान व्यवस्था पटरी पर नहीं आती, तो यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना लंबे समय तक ठहराव का शिकार हो सकती है। 
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शिमला-मटौर फोरलेन के दूसरे चरण का टेंडर जारी, जल्द होगा काम शुरू
अर्की (सोलन)। शिमला-मटौर फोरलेन में दूसरे चरण में कार्य शुरू हो गया है। इसमें निर्माण कंपनी ने कलरवाला से दढयौटा तक निर्माण कार्य शुरू दिया है। तीन चरणों में बनने वाले सड़क मार्ग में प्रथम चरण में बिलासपुर के नौणी से कलरवाला, दूसरे चरण में कलरवाला से दढयौटा (पिपलुघाट) जबकि तृतीय चरण में दढयौटा (पिपलुघाट) से शालाघाट तक इसका निर्माण होना है। इसमें चार सुरंगें भी बनेंगी। मौजूदा समय में भराड़ीघाट (कलर वाला) से नौणी तक कार्य प्रगति पर है। इसमें दो कंपनियों को कार्य मिला है।

भराड़ीघाट से नौणी तक करीब 17.5 किलोमीटर हिस्से का निर्माण गाबर कंपनी कर रही है। कंपनी को निर्माण कार्य के लिए 640 करोड़ रुपये का टेंडर हुआ है जबकि दढयौटा से भराड़ीघाट तक करीब 7.815 किलोमीटर का टेंडर आरकेसीपीएल कंपनी को 435 करोड़ दिया गया है। इस हिस्से में 345 मीटर और 300 मीटर की टनलें भी बननी हैं। दढयौटा से शालाघाट तक लैंड एक्विजिशन के अलावा प्रभावितों को मुआवजा राशि तक देने का कार्य भी अंतिम चरण में है। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया के बाद कार्य भी शुरू हो जाएगा।

शिमला से नौणी (बिलासपुर) तक बनने वाले इस सड़क मार्ग में करीब 25 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी सड़क निर्माण में करीब तीन किलोमीटर की लंबी सुरंग जबकि तीन अन्य छोटी सुरंगें बनाई जाएंगी। फोरलेन निर्माण से जहां लोअर हिमाचल के साथ-साथ बिलासपुर और सोलन जिले के अधिकांश लोगों को शिमला पहुंचने, वहीं ऊपरी हिमाचल के लोगों को बिलासपुर के एम्स तक पहुंचने में काफी आसानी होगी।

शिमला-मटौर प्रस्तावित फोरलेन में दूसरे चरण में कार्य शुरू हो गया है। इसके टेंडर करीब 435 करोड़ के लगाए गए हैं। कलरवाला से दढयौटा तक यह टेंडर अलॉट हुआ है। एनएचएआई की गाइडलाइन के अनुसार ही कार्य किया जा रहा है -निशांत तोमर, उपमंडलाधिकारी, अर्की
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