भुगतान रोके जाने से आरवीएनएल के सिर पर करोड़ों रुपये की देनदारी पेंडिंग हो गई है। इसका सीधा असर काम कर रहे ठेकेदारों पर पड़ रहा है। वर्तमान में रेललाइन परियोजना में तीन विभाग सिविल, इलेक्ट्रिकल और सिग्नल एंड कम्युनिकेशन काम कर रहे हैं। तीनों विभागों की ही करोड़ों की पेमेंट रुकी है।
इस संकट का असर केवल मौजूदा निर्माण कार्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आगामी विकास योजनाएं भी इससे प्रभावित हो गई हैं। आरवीएनएल को बिलासपुर स्टेशन भवन, पहाड़पुर स्टेशन भवन और जकातखाना स्टेशन भवन के लिए बड़े टेंडर जारी करने थे। बजट उपलब्ध न होने के कारण इन सभी टेंडर को फिलहाल होल्ड पर डाल दिया गया है। इससे परियोजना की समय सीमा और आगे बढ़ने की आशंका है। राज्य सरकार की भूमिका का असर भूमि अधिग्रहण पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बध्यात से आगे बैरी तक रेल लाइन के लिए आवश्यक जमीन का अधिग्रहण अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
भूमि अधिग्रहण में देरी के चलते इस हिस्से में कार्य शुरू होना संभव नहीं हो पा रहा, जिससे पूरी परियोजना की प्रगति बाधित हो रही है। यदि शीघ्र ही राज्य सरकार अपना हिस्सा जारी नहीं करती और भुगतान व्यवस्था पटरी पर नहीं आती, तो यह महत्वाकांक्षी रेल परियोजना लंबे समय तक ठहराव का शिकार हो सकती है।