हिमाचल प्रदेश में हर पंजीकृत बेरोजगार से पूछा जाएगा कि उसे नौकरी मिली है कि नहीं। पहली बार असल बेरोजगारों का रिकार्ड तैयार होगा।
राज्य अर्थ एवं सांख्यिकी महकमे ने इसका प्रस्ताव बनाकर योजना विभाग को भेजा है।
मंजूरी मिलते ही सर्वेक्षण शुरू होगा। राज्य के 67 रोजगार केंद्रों में दर्ज बेरोजगारों की कुल संख्या 8 लाख 49 हजार है। इस सर्वेक्षण को प्रश्नावलियां तैयार की जाएंगी। पूछा जाएगा कि कहां नौकरी मिली है, संबंधित अन्य सवाल भी होंगे।
इस सर्वेक्षण केलिए श्रम एवं रोजगार महकमे ने अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग से अनुरोध किया। प्रारंभिक व्यय को दो लाख रुपये का बजट भी दिया है। इस धनराशि से प्रश्नावलियां छापने की तैयारी है।
सांख्यिकी विभाग के आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण रोजगार महकमे के अनुरोध पर किया जाएगा। प्रस्ताव पर योजना विभाग की मंजूरी का इंतजार है।
सभी 67 रोजगार केंद्रों से रिकार्ड एकत्र किया जाएगा। हर बेरोजगार से संपर्क कर उसकी वर्तमान नौकरी की जानकारी ली जाएगी। शुरू में इन केंद्रों से नमूने लिए जाएंगे। बाद में हर बेरोजगार से संपर्क करने का प्रयास होगा।
क्यों पड़ी सर्वेक्षण की जरूरत
कांग्रेस मेनिफेस्टो में बेरोजगारी भत्ता देना प्रमुख घोषणा है। रोजगार विभाग के पास दर्ज 8 लाख 49 हजार बेरोजगारों में से वास्तविक बेरोजगार कितने हैं और कितनों की कहां नौकरी लगी है। इसकी सही जानकारी नहीं है।
इसीलिए ही इस सर्वेक्षण की जरूरत महसूस हुई। हालांकि, हिमाचल में बेरोजगारी भत्ते के स्थान पर कौशल विकास भत्ता योजना लागू है।
इसमें उम्मीदवारों से स्वघोषणा ली जा रही है कि उनकी कहीं भी नौकरी नहीं लगी है। इससे इस स्वघोषणा का भी क्रॉस निरीक्षण संभव होगा।