ज्योति ने चौथी कक्षा में चुनी कबड्डी, 26 की उम्र में 17 गोल्ड
चौथी कक्षा से कबड्डी का सफर शुरू करने वाली सोलन के चायल क्षेत्र की ज्योति ठाकुर ने संघर्ष, मेहनत और लगन के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। 26 वर्ष की उम्र में 15 नेशनल स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकीं ज्योति का तीसरी बार भारतीय महिला कबड्डी टीम में चयन हुआ है। वह दो बार एशिया कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी रह चुकी हैं। आर्थिक चुनौतियों के बीच स्कूल जाने के लिए रोजाना आठ किलोमीटर पैदल चलने वाली ज्योति ने कबड्डी को अपना जुनून बनाया और सफलता हासिल करती गईं। क्षेत्र की ग्राम पंचायत धंगील के गांव जखेड की ज्योति हाल ही में भारतीय टीम के चयन के लिए गुजरात के गांधीनगर में हुए कोचिंग कैंप में शामिल हुईं। कैंप में देशभर से 45 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। चयन प्रक्रिया के बाद ज्योति को 12 सदस्यीय भारतीय महिला कबड्डी टीम में जगह दी गई। इससे पहले वह चीन और ईरान में एशिया कप कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं। चीन एशियाई खेलों में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था।
संघर्ष भरा रहा है ज्योति का बचपन
ज्योति का बचपन भी संघर्षों से भरा रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह स्कूल जाने के लिए प्रतिदिन करीब आठ किलोमीटर पैदल चलतीं। उन्होंने दसवीं कक्षा पंचायत के ढोल का जुब्बड़ स्कूल से की। यहां वह पैदल जाती थीं। जमा दो की पढ़ाई सोलन स्कूल से की। घर लौटने के बाद वह खेतीबाड़ी में परिवार की मदद करतीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कबड्डी को चुना और चौथी कक्षा में ही पहली बार राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन करती रहीं। ज्योति के पिता सुरेश ठाकुर ने कहा कि उनकी बेटी ने भारतीय टीम में चयन के लिए कड़ी मेहनत की है। भारतीय टीम में चुना जाना उसका सपना था, जो एक बार फिर पूरा हुआ है।