हिमाचल ट्रिब्यूनल में हजारों केसों की फाइलें गुम हो गई हैं। यह वह फाइलें हैं जिन पर ट्रिब्यूनल अपना फैसला दे चुका है। फाइलों के साथ साथ बारह रजिस्ट्रर भी गायब हैं। गुम हुई फाइलों की संख्या करीब 5370 बताई जा रही है।
मामला सामने आने के बाद जांच की गई, जिसमें जांच अफसरों ने इसके लिए रिकार्ड कीपर और चौकीदार को जिम्मेदार ठहराया। इनकी लापरवाही की वजह से फाइलें गुम हुई हैं। शिकायत के आधार पर थाना छोटा शिमला में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई है।
मामला साल 2008 का बताया जा रहा है। उस समय ट्रिब्यूनल को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में शिफ्ट कर दिया गया था। उस दौरान यह फैसला लिया गया कि जिन केसों का निपटारा हो चुका है और जिन पर फैसला आ चुका है उन फाइलों को हाईकोर्ट ले जाने की जरूरत नहीं है।
इसी कड़ी में हजारों फाइलें और रजिस्ट्रर वहीं पर रखे गए। जिन केसों पर फैसले हो चुके थे, जब इन मामलों से संबंधित लोगों ने रिकार्ड मांगा, तब इस बात का खुलासा हुआ कि वहां से बड़े पैमाने पर फाइलें गायब हैं।
इस पर एक जांच कमेटी बनाई गई और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस में मुकदमा कायम करवा दिया गया। एसपी शिमला डीडब्ल्यू ने कहा कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर आगामी छानबीन अमल में लाई जा रही है।
जांच के बाद एफआईआर
पूरे मामले में रिकार्ड कीपर पदम दास चौहान और चौकीदार महेश्वर प्रकाश पर गाज गिरी है। मामला सामने आने के बाद पुलिस को दी शिकायत में हिमाचल ट्रिब्यूनल के रजिस्ट्रार चमन लाल दिल्टा ने कहा कि पदम दास चौहान और महेश्वर प्रकाश को 5370 फाइलें और 12 रजिस्ट्रर सौंपे थे।
यह उन केसों की फाइलें थी जिस पर ट्रिब्यूनल अपना फैसला सुना चुका है। लेकिन यह फाइलें गुम हैं, इस पूरे मामले की जांच डिप्टी रजिस्ट्रार केके सूद (जेबी) और अरविंद्र मल्होत्रा ( रजिस्ट्रार विजिलेंस) प्रदेश उच्च न्यायालय के संचालन में हुआ। जांच अफसरों ने अपनी रिपोर्ट में इन दोनों को हेराफेरी का दोषी पाया गया है।