प्रोजेक्ट में कार्यरत कर्मचारियों का 75 फीसदी वेतन/एरियर आईसीएआर (केंद्रीय कृषि वानिकी अनुसंधान संस्थान झांसी) और 25 फीसदी राज्य सरकार की ओर से वहन किया जाता है। मार्च 2023 में आईसीएआर ने विश्वविद्यालय के 6 कर्मचारियों के 7वें वेतन आयोग के बकाया के लिए 42,97,603 रुपये (इसमें डॉ. पूनम का 75 फीसदी हिस्सा 18,60,374 रुपये शामिल था) की राशि विवि को भेज दी। उच्च न्यायालय ने फैसले में स्पष्ट किया कि आईसीएआर की ओर से भेजा गया फंड स्पष्ट रूप से कर्मचारियों के बकाया एरियर के भुगतान के लिए ही जारी किया गया था। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब धनराशि किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए प्राप्त हुई थी, तो उसे उसी उद्देश्य के लिए उपयोग किया जाना अनिवार्य था। विश्वविद्यालय के पास इस राशि को अपने खाते में जमा करने या रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।
अदालत ने पाया कि विवि ने आईसीएआर से मिले रुपये को कर्मचारियों को देने के बजाय अपने सेंट्रलाइज्ड फंड स्कीम खाते में ट्रांसफर कर दिया और एफडी बना ली। विवि ने 29 अप्रैल 2023 को फंडिंग एजेंसी (आईसीएआर) को यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट भी जमा करा दिया, जिसमें यह प्रमाणित किया गया कि राशि का उपयोग कर लिया गया है, जबकि वास्तव में कर्मचारियों को एक रुपये का भी भुगतान नहीं किया गया। विवि की ओर से दलील दी गई कि वे राज्य सरकार की ओर से एरियर जारी करने के निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। वहीं राज्य के वित्त विभाग ने कोर्ट में हलफनामा देकर इस तर्क को खारिज कर दिया। राज्य के वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि उसने आईसीएआर की ओर से जारी 75 फीसदी हिस्से के भुगतान पर कभी कोई रोक नहीं लगाई थी। राज्य का रुख केवल अपने 25 फीसदी हिस्से तक सीमित था। आईसीएआर की ओर से पहले ही जारी की जा चुकी राशि को राज्य सरकार के निर्देशों के नाम पर रोकना पूरी तरह तर्कहीन है।